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रेवदर-रेवदर के सिरोड़ी में संयम जीवन ग्रहण करने वाले हर्षित जितेन्द्र संघवी का जिनवर पथ प्रयाण का रत्नत्रयी
महामहोत्सव शुक्रवार को गुरु भगवंतो के मंगल प्रवेश के साथ शुरु होगा। 11 बहिनो का एकमात्र भाई “हर्षित संघवी” 30 वर्ष की आयु मे दीक्षा ग्रहण करने जा रहा है। हर्षित को श्री पावापुरी तीर्थ मे सूरीमंत्र आराधक आचार्यदेव रविरत्नसूरीजी एवं आचार्य जयेशरत्नसूरीजी ने सिरोडी गृह गांव मे 27 जून को दीक्षा दिलाने का मूर्हत दिया था।दादा – दादी ने किया स्वागत
दादाजी संघवी शांतिलालजी पूनमचंदजी एवं दादी लीला बेन संघवी की तरफ से गांव मे वरघोडा निकाल कर गाजते बाजते हर्षित का भावभरा स्वागत-अभिनंदन किया गया, जिससे
गांव मे माहौल धर्ममय हो गया। 11 बहिनो मे से 1 बहन ने 13 वर्ष पहले दीक्षा लेकर वो साध्वी बनी थी, जिनका नाम है श्रुतरेखाश्रीजी।ज्ञान, दर्शन, चारित्र को समझा और जाना
अहमदाबाद एवं सिरोडी मे दवाई व्यवसाय करने वाले हर्षित संघवी का परिवार एक धार्मिक परिवार होने से उसके जीवन मे शुरु से धार्मिक संस्कार आने से उनका मन धर्म मे बस गया और उन्होने जैन धर्म को समझने और जानने के लिए पंच प्रतिक्रमण, चार प्रकरण, त्रण भाष्य, 2 कर्म ग्रन्थ, वैराग्य शतक, संस्कृत ग्रन्थों का, इन्द्रिय पराजय शतक, प्रशमरति, श्रमण क्रिया सूत्रो का व्यापक अध्ययन किया। चारित्र आराधना के लिए उपधान तप, 64 प्रहरी पौषध, विहार यात्रा, न्वाणु की यात्रा एवं छरि पालित संघ यात्राएं की। दर्शन चारित्र के लिए उसने श्रीशंत्रुजयजी, गिरनारजी, शंखेश्वरजी, सम्मेदशिखरजी एवं अर्बुदगिरी महातीर्थ, 199 कल्याणक भूमि, कुलपार्कजी सहित अनेक तीर्थो की यात्रा कर उन भूमियों की स्पर्शना कर परमात्मा के दर्शन कर उनके बारे में जाना। दीक्षा के पूर्व सिंद्धितप, वर्धमान तप की 17 ओली, भक्तामर तप, ग्यारह, आठ एवं छः उपवास की तपस्या कर तप को जाना।कल से शुरू होगा महामहोत्सव
इस त्रिदिवसीय महोत्सव के पहले दिन प्रातः 7 बजे गुरु भगवंतो का प्रवेश सामैया, 9 बजे शक्रस्तव अभिषेक, दोपहर 1 बजे मामा लाव्या मामेरो कार्यक्रम, 2 बजे हल्दी, शाम 4 बजे श्रमण वेश रंगने का कार्यक्रम, गीत-सांजी-मेहंदी, शाम 7:30 बजे जिनवर जुहार एवं आरती, रात 8 बजे बांदोली एवं 8:30 बजे माता-पिता वंदनावली कार्यक्रम होगा।

