नक्की झील को गंगा मानते हैं आदिवासी: होली के बाद पीपल पूर्णिमा तक अस्थि विसर्जन करने की परंपरा
PALI SIROHI ONLINE
माउंट आबू-.पर्वतीय पर्यटन स्थल माउंट आबू स्थित नक्की झील को आदिवासी समाज गंगा के समान पवित्र मानता है। होली के कुछ दिनों बाद से पीपल पूर्णिमा तक आदिवासी समुदाय के लोग यहां आकर अपनी धार्मिक परंपराएं पूरी करते हैं। वे अपने पूर्वजों की अस्थियों का विसर्जन करने आते हैं।सिरोही जिले का आदिवासी समाज वर्षों से नक्की झील को गंगा के समान पवित्र मानता आ रहा है। आर्थिक रूप से कमजोर होने के कारण वे इतनी दूर गंगा नदी तक नहीं जा पाते, इसलिए यह परंपरा सदियों से चली आ रही है।
परिवार के सदस्यों की मौत के बाद उनकी अस्थियों को संभाल कर रखा जाता है। होलिका दहन के बाद आदिवासियों के समूह लगातार माउंट आबू पहुंचते हैं और नक्की झील पर अपने रीति-रिवाजों के अनुसार परंपराओं को पूर्ण करते हैं।
सोमवार को भी बड़ी संख्या में आदिवासियों का समूह माउंट आबू पहुंचा। यह सिलसिला पीपल पूर्णिमा तक जारी रहेगा, जिसमें अस्थि विसर्जन के साथ अन्य धार्मिक परंपराओं का भी निर्वहन किया जाएगा।
एक आदिवासी युवक ने अपनी पारंपरिक समाज की परंपराओं के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि वे नक्की झील को गंगा की तरह पवित्र मानते हैं। इन परंपराओं को पूरा करने के लिए ही वे माउंट आबू आते हैं और रस्में पूरी होने के बाद खुशी-खुशी अपने घर लौट जाते हैं।
