खेतरली में दिव्यांग को कैम्पो में भी नही दिला पाए सरकारी योजनाओं का लाभ, कच्चा मकान,ना आधार कार्ड ना दिव्यांग प्रमाण पत्र
PALI SIROHI ONLINE
बाली उपखण्ड के खेतरली पंचायत के कोलवाड़ा में दिव्यांग महिला के परिवार पर प्रशासनिक उदासीनता की मार, आधार और दिव्यांग प्रमाण पत्र के बिना ठहरी जिंदगी, आज तक नही मिला पीएम आवास
“न पेंशन, न आवास—सरकारी तंत्र से छूटी दिव्यांग अन्ना बाई”
पाली जिले के बाली उपखंड के नाना थाना क्षेत्र से एक ऐसा मामला सामने आया है, जो सरकारी योजनाओं के जमीनी क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल खड़े करता है। बाली विधानसभा क्षेत्र के ग्राम पंचायत खेतरली के कोलवाड़ा गांव में रहने वाली अन्ना बाई पत्नी बाबूलाल भील की जिंदगी आज भी अभावों और संघर्षों में गुजर रही है।
बचपन से दिव्यांग अन्ना बाई आज तक किसी भी सरकारी योजना का लाभ नहीं ले पाई हैं। उनके पास न आधार कार्ड है और न ही दिव्यांगता प्रमाण पत्र, जिसके कारण वे पेंशन, आवास और अन्य योजनाओं से पूरी तरह वंचित हैं।
परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर है। पति बाबूराम मजदूरी कर जैसे-तैसे परिवार का गुजारा करते हैं। बीमारी या काम बंद होने की स्थिति में परिवार के सामने दो वक्त की रोटी का संकट खड़ा हो जाता है।
टूटे कच्चे मकान में गुजर रहा जीवन
अन्ना बाई के पास पक्का घर भी नहीं है। वे जर्जर कच्चे मकान में रहने को मजबूर हैं, जिसकी छत कभी भी गिर सकती है। प्रधानमंत्री आवास योजना जैसी महत्वपूर्ण योजना का लाभ भी उन्हें नहीं मिल पाया है।
बुनियादी दस्तावेजों के अभाव में रुकी जिंदगी
अशिक्षा और जानकारी के अभाव में परिवार आज भी सरकारी सहायता से दूर है। उनका बेटा शंकर भी आधार कार्ड नहीं होने के कारण स्कूल नहीं जा पा रहा है। परिवार की दो बेटियों की पहले ही मृत्यु हो चुकी है, जिससे हालात और भी दयनीय हो गए हैं।
स्थानीय प्रशासन की उदासीनता उजागर
ग्राम स्तर पर शिविर लगने के बावजूद इस परिवार तक कोई सुविधा नहीं पहुंची। यह स्थानीय प्रशासन और ग्राम विकास तंत्र की निष्क्रियता को दर्शाता है।
हालांकि एक निजी संस्था द्वारा घर तक पानी की पाइपलाइन पहुंचाई गई है, जिससे पीने के पानी की समस्या कुछ हद तक हल हुई है, लेकिन अन्य मूलभूत सुविधाएं अब भी दूर हैं।
विधायक से हस्तक्षेप की मांग
यह मामला बाली विधानसभा क्षेत्र के विधायक पुष्पेंद्र सिंह राणावत के क्षेत्र का है। स्थानीय लोगों का कहना है कि विधायक को इस मामले में तुरंत संज्ञान लेकर संबंधित विभागों को निर्देश देने चाहिए, ताकि अन्ना बाई को सरकारी योजनाओं का लाभ मिल सके।
बड़ा सवाल..?
सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाएं कागजों तक सीमित रह जाएं या जरूरतमंदों तक पहुंचें—यह जिम्मेदारी प्रशासन की है। अन्ना बाई का मामला इस बात की चेतावनी है कि योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करना अब बेहद जरूरी हो गया है।


