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जोधपुर-राजस्थान सरकार के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने हाईकोर्ट की फटकार और लंबी कानूनी लड़ाई के बाद आखिरकार जोधपुर की प्रियंका माथुर को अनुकंपा नियुक्ति दी। विभाग ने 24 दिसंबर को आदेश जारी कर प्रियंका को कनिष्ठ सहायक (LDC) के पद पर नियुक्त किया है।
विभाग ने “मृतक कर्मचारी के बेटे के जीवित होने” का हवाला देकर दो बार प्रियंका का आवेदन खारिज कर दिया था। लेकिन राजस्थान हाईकोर्ट की खंडपीठ ने सरकार की दलीलों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि भाई के इनकार करने पर विवाहित बहन भी नौकरी की हकदार है।
9 महीने बाद जागी सरकार
हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने 6 मार्च 2025 को प्रियंका के पक्ष में फैसला सुना दिया था, लेकिन नियुक्ति आदेश अब करीब 9 महीने बाद जारी हुआ है। निदेशक (अराजपत्रित) राकेश कुमार शर्मा द्वारा जारी आदेश के अनुसार प्रियंका को खाद्य विश्लेषक, जन स्वास्थ्य प्रयोगशाला जोधपुर में पदस्थापित किया गया है।
यह है पूरा मामलाः भाई ने ठुकराई थी नौकरी
उम्मेद अस्पताल जोधपुर में महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ता के पद पर तैनात लीला माथुर का 31 अक्टूबर 2020 को निधन हो गया था। उनके निधन के बाद विभाग ने उनके बेटे रवि माथुर को अनुकंपा नियुक्ति का प्रस्ताव दिया।
रवि ने व्यक्तिगत कारणों से 18 अक्टूबर 2021 को लिखित में नौकरी लेने से इनकार कर दिया। इसके बाद उनकी विवाहित बेटी प्रियंका माथुर ने 8 नवंबर 2021 को आवेदन किया। लेकिन विभाग ने यह कहते हुए फाइल बंद कर दी कि “नियमों के मुताबिक बेटे के जीवित रहते विवाहित बेटी को नौकरी नहीं मिल सकती”।
वकील का तर्कः “संशोधन बैक डेट पर प्रभावी नहीं हो सकता”
मामले में प्रियंका की ओर से पैरवी करते हुए अधिवक्ता यशपाल खिलेरी ने कोर्ट में तर्क दिया कि सरकार वर्ष 2021 के जिस संशोधन का हवाला दे रही है। वह इस मामले में लागू ही नहीं होता। अधिवक्ता खिलेरी ने बताया कि कर्मचारी की मृत्यु 2020 में हुई थी और उस समय 1996 के पुराने नियम प्रभावी थे। पुराने नियमों में “विवाहित बेटी” को भी आश्रित माना गया है (प्रियंका श्रीमाली बनाम स्टेट ऑफ राजस्थान केस के तहत)।
उन्होंने तर्क दिया कि 28 अक्टूबर 2021 को हुआ संशोधन, जिसमें बेटे के होने पर बेटी को बाहर रखा गया है। वह भविष्य के मामलों पर लागू होगा, पुराने मामलों पर नहीं।
कोर्ट ने कहा- “याचिकाकर्ता पूर्णतः पात्र है”
जस्टिस चंद्रशेखर और जस्टिस चंद्रशेखर शर्मा की खंडपीठ ने एकलपीठ के फैसले को सही ठहराते हुए सरकार की अपील खारिज कर दी। कोर्ट ने अपने फैसले में लिखा
” तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए याचिकाकर्ता (विवाहित बेटी) अनुकंपा नियुक्ति के लिए पूरी तरह से योग्य है। सरकार की यह दलील खारिज की जाती है कि बेटा के होते हुए बेटी को लाभ नहीं मिल सकता, क्योंकि भाई ने अपनी सहमति (No Objection) दे दी थी।
कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि नियुक्ति के लाभ भविष्यलक्षी (Prospectively) होंगे।
वेतन और शर्तें: 2 साल तक फिक्स सैलरी
कोर्ट के आदेश के इतने महीनों बाद सरकार की ओर से जारी नियुक्ति आदेश के अनुसार प्रियंका को 2 वर्ष के लिए परिवीक्षाधीन प्रशिक्षणार्थी (Probationer Trainee) के रूप में रखा गया है। इस दौरान उन्हें फिक्स मासिक पारिश्रमिक मिलेगा। 2 साल बाद संतोषजनक सेवा होने पर लेवल-5 का नियमित वेतनमान दिया जाएगा।

