सीमेंट की आड़ में तस्करी, 55 लाख की अफीम पकड़ी: चार बार रूट बदलकर पुलिस को चकमा देने की कोशिश, 8 घंटे पीछा कर पकड़ा
PALI SIROHI ONLINE
जालोर-जालोर की एएनटीएफ टीम ने सिरोही जिले के रेवदर-आबूरोड मार्ग पर एक ट्रक से 10 किलो 900 ग्राम अफीम का दूध बरामद किया। यह खेप सांचौर पहुंचनी थी। बरामद अफीम की अनुमानित कीमत 55 लाख रुपए आंकी गई है। कार्रवाई के दौरान टीम ने ट्रक को घेराबंदी कर रोका और तलाशी में अफीम बरामद की। तस्कर ने पुलिस को चार बार रूट बदलकर चकमा देकर भागने का प्रयास किया, लेकिन पुलिस ने लगातार 8 घंटे पीछा कर आखिरकार उसे दबोच लिया।गिरफ्तार तस्कर चित्तौड़गढ़ के नांदोली निवासी पूरण गायरी 8वीं पास है। आरोपी लंबे समय से मेवाड़ से मारवाड़ तक अफीम की बड़ी खेप सप्लाई कर रहा था। हर फेरे में 40 से 50 हजार रुपए कमा रहा था। ग्रामीण रूट, वर्चुअल व्हाट्सएप नंबर और बार-बार लोकेशन बदलकर पुलिस को चकमा देने की कोशिश करता रहा।सीमेंट की आड़ में चलता था तस्करी का नेटवर्क
आईजी विकास कुमार ने बताया – आरोपी लंबे समय से मेवाड़ से मारवाड़ तक अवैध मादक पदार्थों की सप्लाई कर रहा था। वह निम्बाहेड़ा की सीमेंट फैक्ट्री से ट्रक में सीमेंट भरकर सांचौर आता था और रास्ते में तस्करों से संपर्क कर अफीम की खेप लेता था। इसके बाद वह जालोर-सांचौर इलाके में सप्लाई करता था। इसी सूचना के आधार पर एएनटीएफ टीम ने उसके मूवमेंट पर नजर रखना शुरू किया और फिर घेराबंदी कर उसे पकड़ लिया।
खलासी की सूचना से खुला पूरा तस्करी नेटवर्क
जांच में सामने आया कि आरोपी पूरण लंबे समय तक एक खलासी के साथ काम करता था, जिसने पूरे नेटवर्क और तस्करी के तरीके को करीब से देखा था। बाद में नशा मुक्ति अभियान से प्रभावित होकर खलासी ने एएनटीएफ से संपर्क कर गिरोह की जानकारी दी। इसी सूचना के बाद टीम एक्टिव हुई और मुखबिर इनपुट के आधार पर कार्रवाई को अंजाम दिया गया।8 घंटे पीछा, चार बार चकमा देने की कोशिश
निम्बाहेड़ा से निकलने के बाद टीम ने आरोपी का करीब 8 घंटे तक पीछा किया। इस दौरान उसने चार बार पुलिस को चकमा देने की कोशिश की। वह पहले भदसोडा में दिखा, फिर उदयपुर-गोगुंदा रूट पर गायब हो गया। बाद में स्वरुपगंज में नजर आया और ग्रामीण रास्तों से भागने की कोशिश करता रहा। इसके बाद वह आबूरोड-रेवदर मार्ग से होते हुए मंडार की तरफ भागने की कोशिश में था, लेकिन टीम ने पहले से घेराबंदी कर उसे पकड़ लिया।
8वीं पास आरोपी, वर्चुअल नंबर से बचता था पुलिस से
पूछताछ में सामने आया कि आरोपी पूरण केवल 8वीं पास है, लेकिन उसने खुद को बचाने के लिए वर्चुअल व्हाट्सऐप नंबर और ग्रामीण रूट नेटवर्क का इस्तेमाल शुरू कर दिया था।
वह लोकेशन छिपाने और पुलिस से बचने के लिए बार-बार रूट बदलता था। आरोपी ने बताया कि वह पिछले करीब 3 साल से तस्करी कर रहा था और हर फेरे में उसे 40 से 50 हजार रुपए मिलते थे। वह कई बार बड़ी खेप पहुंचा चुका था, लेकिन उसे याद नहीं कि कितनी बार और किसे माल दिया।
उसने यह भी स्वीकार किया कि पिछले साल जनवरी में वह पिंडवाड़ा क्षेत्र में अफीम के साथ पकड़ा गया था, लेकिन 15 दिन में जमानत मिलने के बाद फिर से तस्करी में सक्रिय हो गया।
