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आबूरोड-अंबाजी के प्रसिद्ध मोहनथाल प्रसाद को भारत सरकार ने भौगोलिक संकेतक (जीआई) टैग प्रदान किया है। इसके साथ ही यह प्रसाद तिरुपति के लड्डू और पलानी के पंचामृतम जैसे विशिष्ट धार्मिक प्रसादों की श्रेणी में शामिल हो गया है।
नवरात्रि के पहले दिन अंबाजी के चाचर चौक में समारोह में जीआई प्रमाण पत्र श्री आरासुरी अंबाजी माता देवस्थान ट्रस्ट को सौंपा गया। कार्यक्रम में कंट्रोलर जनरल ऑफ पेटेंट्स, डिजाइन एवं ट्रेडमार्क तथा जीआई रजिस्ट्रार प्रो. डॉ. उन्नतपी. पंडित की अध्यक्षता रही। प्रमाण पत्र 1 अक्टूबर को जारी किया था। समारोह में भारतीय उद्योग परिसंघ, सहयोगी संस्थाओं के प्रतिनिधि, मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारी मौजूद रहे।
जीआई टैग मिलने से मोहनथाल प्रसाद की नकल और अनधिकृत उपयोग के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का रास्ता मजबूत होगा। इससे श्रद्धालुओं को असली और पारंपरिक प्रसाद की पहचान करने में भी मदद मिलेगी। प्रो. डॉ. पंडित ने बताया कि अहमदाबाद स्थित एंटरप्रेन्योरशिप डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया की ओर से जीआई उत्पादों के लिए विशेष स्टोर संचालित किया जा रहा है। इससे पारंपरिक उत्पादों को बाजार में पहचान और बढ़ावा मिलेगा। बनासकांठा कलेक्टर मिहिर पटेल ने कहा कि यह उपलब्धि मां जगदंबा के प्रति लाखों भक्तों की आस्था और क्षेत्र की आध्यात्मिक विरासत का सम्मान है। मंदिर प्रशासक कौशिक मोदी ने ट्रस्ट की ओर से किए गए प्रयासों की जानकारी दी।




