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सिरोही-पिंडवाड़ा नगर पालिका में एक जीवित व्यक्ति को सरकारी रिकॉर्ड में मृत दर्शाकर जनआधार कार्ड से नाम हटाने का मामला सामने आया है। पीड़ित की शिकायत पर न्यायालय के इस्तगासे के जरिए पिंडवाड़ा थाने में विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।
प्रकरण में नगर पालिका के तत्कालीन कंप्यूटर ऑपरेटर पर तत्कालीन अधिशाषी अधिकारी के डिजिटल सिग्नेचर औरआईडी-पासवर्ड का दुरुपयोग कर रिकॉर्ड में हेरफेर करने का आरोप लगाया गया है। पुलिस के अनुसार झाड़ोली निवासी लक्ष्मण माली (40) पुत्र बाबूलाल माली ने रिपोर्ट में बताया कि उनका विवाह सोनू माली के साथ हुआ था। सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए दोनों का जनआधार कार्ड बनाया गया था, जिसमें पत्नी को मुखिया बनाया गया था। वर्ष 2020 में आपसी मतभेद के बाद दोनों अलग रहने लगे। जनवरी 2026 में जब लक्ष्मण माली ने नया जनआधार कार्ड बनवाने का प्रयास किया तो ऑनलाइन प्रक्रिया में समस्या आने लगी। जांच करने पर पता चला कि जनआधार पोर्टल पर 6 मई 2020 को उन्हें मृत दर्शाते हुए उनका नाम कार्ड से हटा दिया गया था।
पालिका के पत्र में डिजिटल आईडी के दुरुपयोग का उल्लेख : मामले में नगर पालिका पिंडवाड़ा के वर्तमान अधिशाषी अधिकारी योगेश आचार्य द्वारा जारी पत्र में उल्लेख किया गया है कि तत्कालीन कंप्यूटर ऑपरेटर परेश कुमार माली ने तत्कालीन अधिशाषी अधिकारी की आईडी और पासवर्ड का कथित रूप से दुरुपयोग करते हुए जीवित व्यक्ति को सरकारी दस्तावेजों में मृत दर्शाया।
पालिका की ओर से जारी पत्र में इस कृत्य को गंभीर प्रकृति का मामला बताते हुए संबंधित कार्रवाई का उल्लेख किया गया है। इसी आधार पर पीड़ित ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। आरोपियों में दो सोनू के भाई हैं पुलिस ने लक्ष्मणमाली की रिपोर्ट पर तत्कालीन कंप्यूटर ऑपरेटर परेश कुमार माली, पत्नी सोनू माली, बीरवाड़ा के ई-मित्र संचालक हेमंत कुमार माली, तत्कालीन अधिशाषी अधिकारी दीपिका वीरवाल तथा अन्य संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। कम्प्यूटर ऑपरेटर सोनू का सगा भाई और ई मित्र संचालक ममेरा भाई है।
इन पर धोखाधड़ी का केस दर्ज हुआ। तकनीकी जांच में जुटी पुलिस मामले की जांच पिंडवाड़ा थाने के सहायक उपनिरीक्षक ओमप्रकाश को सौंपी गई है। पुलिस का कहना है कि सरकारी रिकॉर्ड में कथित हेरफेर और डिजिटल माध्यम से किए गए बदलावों की जांच की जा रही है। जनआधार पोर्टल के रिकॉर्ड, लॉग्स और संबंधित दस्तावेजों की पड़ताल की जाएगी। जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।


