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जालोर-नर्सेज डे पर राज्य स्तरीय सम्मान पाने के लिए नर्सिंग कॉलेज के प्रिंसिपल पवन ओझा की ओर से किए गए फर्जीवाड़े को लेकर मंगलवार को जांच टीम मौके पर पहुंची। टीम द्वारा पूरे मामले की जांच की जा रही है, जिसकी रिपोर्ट बुधवार को जिला कलेक्टर को सौंपी जाएगी। मामले में कलेक्टर और सीएमएचओ ने दो अलग-अलग जांच टीमें गठित की थीं, जिनमें से कलेक्टर की ओर से गठित टीम ने जांच शुरू कर दी है, जबकि सीएमएचओ की टीम ने अभी जांच आरंभ नहीं की है।
GNM ट्रेनिंग सेंटर प्रिंसिपल पद से हटाया गया
मामले के सामने आने के बाद पवन ओझा को जीएनएम ट्रेनिंग सेंटर के प्रिंसिपल पद से हटा दिया गया है। ओझा के पास नर्सिंग कॉलेज के प्रिंसिपल के साथ-साथ जीएनएम ट्रेनिंग सेंटर का भी अतिरिक्त चार्ज था। पीएमओ वीपी मीणा ने बताया कि विवाद सामने आने के बाद जिला अस्पताल प्रशासन ने उन्हें इस पद से हटा दिया है।
सम्मान के लिए बनाई कमेटी, खुद को ही शामिल कर लिया
जांच में सामने आया है कि पवन ओझा ने राज्य स्तरीय सम्मान प्राप्त करने के लिए पहले 6 सदस्यों की कमेटी बनाई, जिसमें उन्होंने खुद को भी दो सदस्य के रूप में शामिल कर लिया। नियमों के अनुसार इस कमेटी में नर्सिंग कॉलेज के प्रिंसिपल और नर्सिंग स्कूल के प्रिंसिपल को शामिल नहीं किया जाता, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने स्वयं को पदनाम सहित कमेटी में शामिल किया।
अनुशंसा पत्र पर दो अलग-अलग हस्ताक्षर का आरोप
आरोप है कि ओझा ने सम्मान के लिए भेजे गए अनुशंसा पत्र पर अपने दोनों पदनामों से अलग-अलग हस्ताक्षर किए, ताकि राज्य स्तरीय कमेटी को किसी तरह की गड़बड़ी का पता न चल सके। इस पूरे मामले को लेकर अब गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
डिग्री की भी होगी जांच, राजमेस को भेजी जाएगी रिपोर्ट
नर्सिंग कॉलेज चिकित्सा शिक्षा विभाग के राजमेस के अधीन संचालित होती हैं। जालोर के नर्सिंग कॉलेज में पवन ओझा की नियुक्ति राजमेस द्वारा प्रिंसिपल पद पर की गई थी। जिला अस्पताल भवन में संचालित होने के कारण इसकी मॉनिटरिंग जिला अस्पताल प्रशासन द्वारा भी की जाती है। अस्पताल प्रशासन के अनुसार, पवन ओझा की एमएससी डिग्री का रिकॉर्ड अस्पताल में उपलब्ध नहीं है, जिसकी अब जांच कर रिपोर्ट राजमेस को भेजी जाएगी।

