• May 14, 2026

आबू-डालियों में फंसा किंगफिशर, आवाज ने खींचा लोगों का ध्यानः जीव प्रेमी, वन विभाग और स्थानीय लोगों ने चलाया रेस्क्यू अभियान

PALI SIROHI ONLINE

माउंट आबू-माउंट के मुख्य बाजार स्थित शांति विजय उद्यान में एक किंगफिशर पक्षी का पंख अचानक पेड़ की ऊंची डालियों में फंस गया, जिससे वह काफी देर तक पेड़ से लटका चीखता और तड़पता रहा। पक्षी की दर्दभरी आवाज सुनकर राहगीरों ने तुरंत इसकी सूचना जीव प्रेमियों और वन विभाग को दी। इसके बाद सभी ने मिलकर रेस्क्यू अभियान चलाया और काफी मशक्कत के बाद पक्षी को सुरक्षित बचाकर उसका इलाज कराया गया।राहगीरों ने दिखाई संवेदनशीलता, तुरंत दी सूचना

घटना के दौरान उद्यान से गुजर रहे स्थानीय लोगों की नजर पेड़ पर फंसे किंगफिशर पक्षी पर पड़ी। पक्षी लगातार चीख रहा था और परेशानी में नजर आ रहा था। उसकी स्थिति देखकर राहगीरों ने देर किए बिना खुशी सेवा ट्रस्ट के विष्णु दत्त कौशिक और जीव प्रेमी व अधिवक्ता गौरव कौशिक को सूचना दी।

ऊंचाई पर फंसा था पक्षी, बढ़ी चिंता

सूचना मिलने के बाद विष्णु दत्त कौशिक और गौरव कौशिक मौके पर पहुंचे। वहां पहुंचकर उन्होंने देखा कि पक्षी पेड़ की काफी ऊंची डालियों में फंसा हुआ था, जिससे उसे निकालना आसान नहीं था। स्थिति को गंभीर देखते हुए तत्काल वन विभाग से संपर्क किया गया।

वन विभाग ने शुरू किया रेस्क्यू अभियान

सूचना मिलते ही वन विभाग के वनपाल मोहन राम और लाल सिंह मौके पर पहुंचे। दोनों ने हालात का जायजा लिया और पक्षी को सुरक्षित निकालने की तैयारी शुरू की। इस दौरान मौके पर लोगों की भीड़ भी जमा हो गई और सभी की निगाहें रेस्क्यू अभियान पर टिकी रहीं।

शिक्षक ने दिखाई हिम्मत, पेड़ पर चढ़कर बचाई जान

इसी बीच शिक्षक राजकुमार परमार भी वहां पहुंचे। उन्होंने बिना समय गंवाए पेड़ पर चढ़ने का फैसला किया। काफी मेहनत और सावधानी के साथ उन्होंने ऊंचाई तक पहुंचकर किंगफिशर पक्षी को सुरक्षित नीचे उतार लिया। पक्षी के नीचे आते ही वहां मौजूद लोगों ने राहत की सांस ली।

इलाज के बाद फिर खुले आसमान में छोड़ा गया

रेस्क्यू के बाद सेवानिवृत्त पशु चिकित्सक दशरथ जी लखारा ने पक्षी का इलाज किया। जांच और आवश्यक इलाज के बाद जब पक्षी की स्थिति सामान्य हुई, तो उसे सुरक्षित वापस प्राकृतिक वातावरण में छोड़ दिया गया।

यह पूरी घटना न केवल एक पक्षी की जान बचाने की कहानी बनी, बल्कि यह भी दिखाती है कि इंसानों की संवेदनशीलता और सामूहिक प्रयास किसी बेजुबान जीव के लिए जीवनदान साबित हो सकते हैं।

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