PALI SIROHI ONLINE
सिरोही। रामझरोखा मंदिर की जमीन पर बनाए गए 8 पट्टों के बहुचर्चित मामले में स्वायत्त शासन विभाग (डीएलबी) ने बड़ी कार्रवाई की है।
विभाग ने पट्टे अनियमित रूप से जारी होने की पुष्टि करते हुए नगर परिषद सिरोही के तत्कालीन आयुक्त शिवपालसिंह राजपुरोहित (वर्तमान में एपीओ) को निलंबित किया । स्वायत्त शासन विभाग, जयपुर के निदेशक ने निलंबन आदेश जारी किए। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय निदेशालय स्थानीय निकाय, जयपुर रहेगा तथा जीवन निर्वाह भत्ते का भुगतान नगर निगम उदयपुर द्वारा किया जाएगा। इससे पहले कलेक्टर अल्पा चौधरी ने जांच में अनियमितता पाए जाने पर 30 दिसंबर, 2025 को सभी 8 पट्टे निरस्त करने के आदेश दिए थे। इसके बाद 1 जनवरी, 2026 को नगर परिषद ने पट्टाधारकों को नोटिस जारी किए। हालांकि पट्टाधारकों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की, जिस पर 9 जनवरी 2026 को न्यायालय ने कलेक्टर के आदेश निरस्त कर स्वतंत्र, निष्पक्ष पुनः जांच के निर्देश दिए। वर्तमान में जांच प्रक्रिया जारी है।
{14 फरवरी 2026 : तत्कालीन आयुक्त को निलंबित किया गया 30 दिसंबर 2025: कलेक्टर ने पट्टे निरस्त करने के दिए थे आदेश
{1 जनवरी 2026 : कलेक्टर ने पट्टे निरस्त करने के दिए थे आदेश पहले भी हुआ था विरोध मामला सामने आने पर 9 दिसंबर, 2025 को कांग्रेस कार्यकर्ताओं, जनप्रतिनिधियों और स्थानीय लोगों ने प्रदर्शन कर पट्टे निरस्त करने की मांग की थी। ज्ञापन सौंपने के बाद प्रशासन ने जांच शुरू करवाई थी। जांच जारी, रिपोट के आधार पर कार्रवाई : नगर परिषद के प्रशासक डॉ. राजेश गोयल (एडीएम) ने बताया कि उच्च न्यायालय के निर्देशानुसार मामले की जांच जारी है और रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
{9 जनवरी 2026 : हाई कोर्ट ने आदेश खारिज कर जांच के आदेश दिए क्या है मामला: रामझरोखा मंदिर की करीब 18,614 वर्ग फीट भूमि, जो पीडब्ल्यूडी कार्यालय से राजमाता धर्मशाला जाने वाले मार्ग पर स्थित है, पर नगर परिषद ने जुलाई, 2025 में 8 पट्टे जारी किए थे। जमाबंदी रिकॉर्ड के अनुसार सिरोही-2 के खसरा नंबर 2711 (पूर्व 2094), रकबा 0.3100 हेक्टेयर भूमि राज्य सरकार के नाम दर्ज है और इसकी प्रकृति गैर मुमकिन आबादी है। जांच में सामने आया कि नगर परिषद के स्वामित्व में न होने के बावजूद धारा 69-ए के तहत अपंजीकृत इकरारनामे के आधार पर पट्टे जारी किए गए, जो नियम विरुद्ध पाए गए। मामले में पूर्व महंत जयरामदास महाराज की दो अलग-अलग वसीयतें सामने आईं एक 8 मार्च 2001 और दूसरी 20 मार्च 2001 की।
दोनों में महंत सीतारामदास को उत्तराधिकारी बताया गया है, लेकिन जमीन विक्रय अधिकार को लेकर विरोधाभास है। आरटीआई के माध्यम से प्राप्त दस्तावेजों में नगर परिषद ने 20 मार्च, 2001 की वसीयत उपलब्ध कराई, जबकि पट्टे जारी करते समय 8 मार्च 2001 की वसीयत का हवाला दिया गया। इससे परिषद की भूमिका पर सवाल खड़े हुए। {जुलाई 2025 : नप ने रामझरोखा मंदिर की जमीन पर बनाए 8 पट्टे

