मुमुक्षु अंजू की बंदोली निकली: रविवार को सांसारिक सुख त्याग कर लेंगी राणावास में दीक्षा
PALI SIROHI ONLINE
आऊवा-आऊवा के निकट राणावास स्थित श्री वर्धमान जैन छात्रावास में शनिवार को मुमुक्षु अंजू और वर्षीत आराधकों की बड़ी बंदोली का आयोजन किया गया। यह आयोजन श्री मरुधर केसरी वर्षीतप पारणा एवं जैन भागवती दीक्षा महोत्सव समिति के तत्वावधान में त्रिवेणी महोत्सव के तहत हुआ।
सांसारिक जीवन का त्याग करने से पूर्व शोभायात्रा निकाली गई, जिसके माध्यम से दीक्षार्थी अंजू की अनुमोदना की गई। रथ यात्रा से पहले अंजू ने अपने जन्मदाता माता-पिता इन्दर सिंह-नोरत कंवर और धर्म माता-पिता सूरज कंवर नवरतनमल गुन्देचा के साथ वरिष्ठ प्रवर्तक गुरुदेव सुकनमल महाराज और उपप्रवर्तक गुरुदेव अमृत मुनि महाराज से मंगलिक एवं शुभाशीष प्राप्त किए।
ढोल-नगाड़ों और शहनाई वादन के साथ मुमुक्षु अंजू का वर्गोड़ा निकाला गया। इस शोभायात्रा में दूर-दराज से पहुंचे जैन समाज के लोगों ने बड़ी संख्या में हिस्सा लिया।
धर्म सभा को संबोधित करते हुए सुकनमल महाराज ने कहा कि धर्म की रक्षा सही रूप से होने पर ही धर्म हमारी रक्षा करेगा। पूज्य गुरुदेव अमृत मुनि ने मुमुक्षु अंजू की विनम्रता और धर्मश्रद्धा की सराहना करते हुए कहा कि धर्म किसी जाति की बपौती नहीं, बल्कि जो इसे धारण और आचरण करता है, धर्म उसकी आत्मा का मूल स्वभाव बन जाता है। डॉ. राजमती म. सा. ने अंजू में वैराग्य के बीज वपन और संयम जीवन में प्रवेश की आतुरता की कथा सुनाई।इस अवसर पर मुमुक्षु अंजू ने अपने भाइयों और श्रावकों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधकर जीवों की रक्षा करने का संदेश दिया। दीक्षा से पूर्व अंजू का जन्मदिवस भी मनाया गया और उनके दीर्घ संयमी जीवन के लिए मंगल कामनाएं की गईं। बड़ी सांझी के गीतों से वातावरण भक्तिमय हो गया।
मुमुक्षु अंजू रविवार को सांसारिक मोह का त्याग कर दीक्षा ग्रहण करेंगी। गुरुदेवों द्वारा दीक्षा पाठ पढ़ाया जाएगा। साध्वी जीवन में प्रवेश के बाद वे गुरुवर्या पुष्प-राज ग्रुप ठगणा-7 से वर्धमान होकर ठाणा-8 के रूप में रघुनाथ गच्छ की सज्जन वाटिका को महकाएंगी। इस अवसर पर उनके माता-पिता सहित पूरा परिवार मौजूद रहेगा।
