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खीमाराम मेवाडा
एसआईआर को लेकर कांग्रेस सहित विपक्षी दलों पर गरजे कैबिनेट मंत्री कुमावत
प्रेस कॉन्फ्रेंस मे बोले जनादेश का अपमान करते हुए देश को अराजकता की ओर धकेलने की कोशिश मे लगे हुए है विपक्षी दल
मंत्री कुमावत ने बिंदु वार किया खुलासा
तखतगढ 30 अक्टूबर (खीमाराम मेवाडा) केबिनेट मंत्री एवं सुमेरपुर विधायक जोराराम कुमावत ने शुक्रवार को लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओं अभियान के तहत सुमेरपुर में प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की। जिसमें सुमेरपुर व तखतगढ क्षेत्र के सभी पत्रकार प्रिंट एवं सोशल मीडिया बंधु और डिजिटल मीडिया बंधु उपस्थित रहे। प्रेस वार्ता के दौरान मंत्री कुमावत ने कांग्रेस पार्टी द्वारा देश में एसआईआर के नाम पर अराजकता फैलाने के षडयंत्र का खुलासा किया तथा यह स्पष्ट किया कि एसआईआर अभियान निश्चित रूप से मृत मतदाताओं, डुप्लिकेट मतदाताओं को हटाने का लोकतांत्रिक अभियान है। इसमें किसी भी भारतीय नागरिक का नाम नही काटा जायेगा।
लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ अभियान
प्रेसवार्ता के दौरान मंत्री कुमावत कहा कि कांग्रेस सहित विपक्षी दलों द्वारा जनादेश का अपमान करते हुए संवैधानिक संस्थाओं पर सवालिया निशान लगाए जा रहे हैं। यह लोकतंत्र पर करारा प्रहार है और देश को अराजकता की ओर धकेलने की कोशिश है।
देश के विकास को रोकने और जनता के विश्वास को ठेस पहुँचाने के कांग्रेस के प्रयासों से देशवासियो को अवगत करवाने और कांग्रेस की झूठ की पोल खोलने के लिए लोकतंत्र बचाओ अराजकता हटाओ अभियान भारतीय जनता पार्टी ने 22 अक्टूबर से शुरू किया है जो 5 नवम्बर तक चलेगा।
उन्होने कहा SIR (विशेष गहन पुनरीक्षण) जिसको लेकर दुष्प्रचार किया जा रहा है उसका मूल उद्देश्य है की मतदाता सूचियां में शुद्धता आये, किसी मतदाता का निधन हो गया है या किसी मतदाता ने अपना स्थान परिवर्तन कर लिया है। तो ऐसे नाम उस मतदाता सूची में नहीं होने चाहिए साथ ही जो भारत का नागरिक नहीं है क्योंकि भारतीय संविधान भारत के नागरिक को ही वोट देने का अधिकार देता है ऐसे व्यक्ति जो भारत के नागरिक नहीं है। पर किसी कारण से उन्होंने अपना नाम मतदाता सूची में शामिल करवा लिया है। ऐसे लोगों का नाम मतदाता सूची से हटना ही चाहिए। क्योंकि देश की सरकार चुनने का अधिकार केवल भारत के नागरिकों को है विदेशी घुसपैठियों को नहीं। ऐसा नहीं है कि पहली बार देश में एसआईआर हो रहा है इससे पहले भी देश में 12 बार एसआईआर हो चुका है जिनमें से 10 बार कांग्रेस की सरकार थी।
+ लोकतंत्र में जनता के मत की ताकत होती है,
कुमावत ने कहा संविधान और कानून का शासन होता है यहां आप सवाल करने के लिए स्वतंत्र है। पर वे कानून की परिधि में होने चाहिए। हिंसा तोड़फोड़ और सार्वजनिक जीवन को बाधित करने की इजाजत किसी भी प्रकार नहीं मिलती और यदि कोई आप आरोप लगाते हैं तो कानून सम्मत आपको उसके तथ्य भी देने पड़ेंगे। वे कहते हैं कि हमारी सरकार युवाओं के वोट जोड़ना नहीं चाहते है पर यह भूल जाते हैं कि हमारी सरकार में ही अब मतदाता सूचियों में 1 जनवरी 1 अप्रैल 1 जुलाई और 1 अक्टूबर के आधार पर मतदाता सूची में नाम जुड़वाने की व्यवस्था है। इससे पहले केवल वर्ष में एक बार ही यह प्रक्रिया अपनाई जाती थी।
मंत्री कुमावत ने बिंदु वार किया खुलासा
+ 24 जून 2025 यानी एसआईआर शुरू होने के बाद से अब तक लगभग 2.37 करोड़ नए युवा मतदाताओं के नाम जोड़े जा चुके हैं। आज मतदाता सूची में 17.38 करोड़ युवा मतदाता है और हर महीने लगभग 20 लाख युवा मतदाता वोटर लिस्ट में जुड़ रहे हैं।
+ 13 करोड़ नाम काट देने के बारे में कांग्रेस सहित विपक्षी दल झूठ फैला रहे हैं। देश में 20 लाख से ज्यादा बूथ लेवल ऑफिसर ने घर-घर जाकर वेरीफाई किया है नाम काटना आसान नहीं है और ना मनमर्जी से नाम काटे जा सकते हैं।
+ पिछला एसआईआर 2002-2003 में हुआ था 20 वर्षों से अधिक समय बाद हो रही इस कार्रवाई में 2.80 करोड़ मृत मतदाता थे जिनके नाम हटाए गए हैं।
+ 6.3 करोड़ मतदाता ऐसे थे जिन्होंने अपना घर परिवर्तित कर लिया है, एक करोड़ ऐसे मतदाता थे जिनका नाम दो जगह पर था और 3 करोड़ मतदाता ऐसे पाए गए जो वहां पर मिले नहीं और उनके बारे में जानकारी प्राप्त नहीं हुई। यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि नाम को हटाया नहीं गया है बल्कि चिन्हित किए गए हैं।
+ इस प्रक्रिया में 20 लाख से ज्यादा बीएलओ और इससे भी लगभग दुगने राजनीतिक कार्यकर्ता बीएलए जो बूथ स्तर पर प्रत्येक पार्टी के होते हैं वह सम्मिलित होते हैं। उनके सामने मतदाता सूची होती है फिर कैसे इस एसआईआर पर सवाल उठाकर कांग्रेस अपने ही कार्यकर्ताओं पर जो बूथ स्तर पर काम करते हैं प्रश्नचिन्ह लगा रही है।
+ क्या वोट चोरी संभव है? जैसा की कांग्रेस के नेता कहते हैं यदि वोट चोरी है तो फिर एक बूथ पर हारते हैं, दूसरे बूथ पर वह जीत कैसे सकते हैं? एक राज्य में हारते हैं दूसरे राज्य में जीत कैसे सकते हैं? जहां जीत जाते हैं वहां जनादेश हो जाता है, जहां हार जाते हैं उसे वोट चोरी का नाम दे देते है। तो यदि एक राज्य में जिसमें वह जीते हैं वह जनादेश है जिसमें हारे हैं वहां जनता के आदेश को क्यों नहीं मानते?
+ मतदाता सूची बनाते समय बीएलओ जो कि सरकारी अधिकारी / कार्मिक होता है और बूथ लेवल एजेंट जो पॉलिटिकल पार्टी के कार्यकर्ता होते हैं वे मिलकर इस सूची को बनाते हैं इसकी जो ड्राफ्ट है उसमें एब्सेंट शिफ्ट डेड डुप्लीकेट की लिस्ट सबको दी जाती है।
+ मतदाता सूची में नाम जोड़ने या हटाने के संबंध में कानूनी प्रक्रिया है क्लेम करो, ऑब्जेक्शन करो, अपील भी कर सकते है।
वोटिंग वाले दिन पोलिंग बूथ पर उम्मीदवार के पोलिंग एजेंट बैठते हैं सब जगह कैमरे लगे होते हैं, काउंटिंग पर हर उम्मीदवार का काउंटिंग एजेंट बैठता है, हर जगह विपक्ष के कार्यकर्ता व नेता मौजूद होते हैं।
+ रोल से काउंटिंग तक विपक्ष के नेताओं व कार्यकर्ताओं की भागीदारी होती है तो फिर वोट चोरी कैसे हो सकती है? यह वोट चोरी नहीं, जनता ने चोरों को वोट देना छोड़ दिया उसका परिणाम है, कि कांग्रेस सहित विपक्ष के लोग हारते हैं तो अपनी हार का बहाना बनाते हुए इस चुनावी प्रक्रिया को जिसमें आम जनता अपना वोट देती है उसी पर सवालिया निशान लगा दिया जाता है।
+ आज कांग्रेस लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर सवाल उठाकर देश को अराजकता की और धकेलना चाहती है उसकी लोकतंत्र में कितनी निष्ठा है यह किसी से छुपा हुआ नहीं है।
+ 25 जून 1975 की रात देश में आपातकाल की घोषणा की गई। यह आपातकाल 21 मार्च 1977 को समाप्त हुआ।
+ 12 जून 1975 को इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के 1971 के लोकसभा चुनाव को चुनावी अनियमितताओं के आधार पर अमान्य घोषित कर दिया। इसी राजनीतिक संकट के बीच 25 जून की रात आपातकाल घोषित कर दिया गया।
आपातकाल के दौरान नागरिक स्वतंत्रता, प्रेस की आजादी और राजनीतिक गतिविधियों पर व्यापक प्रतिबंध लगाए गए। विपक्षी नेताओं की गिरफ्तारीः- जयप्रकाश नारायण, मोरारजी देसाई, अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी सहित अनेक विपक्षी नेताओं को हिरासत में लिया गया।
+ डॉ. भीमराव अंबेडकर जी और 1952 के चुनाव का तथ्य डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर जी भारतीय संविधान के प्रमुख शिल्पकारों में थे। 1952 के पहले आम चुनाव में उन्होंने बॉम्बे सिटी नॉर्थ संसदीय निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ा था। आधिकारिक अभिलेखों में दर्ज चुनाव परिणाम के अनुसार, अंबेडकर जी को 1,23,576 वोट मिले, जबकि विजयी नारायण सदोबा काजरोलकर को 1,38,137 वोट मिले। इस प्रकार दोनों के बीच अंतर 14,561 वोटों का था। डॉ. अंबेडकर और समाजवादी नेता अशोक मेहता ने चुनाव परिणाम को चुनौती देते हुए निर्वाचन याचिका भी दायर की थी। संबंधित याचिका में निर्वाचन क्षेत्र में कुल 74,333 अमान्य मतपत्रों का उल्लेख किया गया था। यह संख्या अंबेडकर जी की हार के अंतर से अधिक थी।
+ धारा 356 का सर्वाधिक उपयोग कांग्रेस शासन में 93 बार किया गया जिसमें इंदिरा गांधी ने 50 बार, पं. नेहरू ने 17 बार, राजीव गांधी के कार्यकाल में 6 बार राष्ट्रपति शासन लागू किया गया।
+ चुनाव आयोग में किस तरह चुनाव आयुक्त की नियुक्ति होती थी यह किसी से छुपा हुआ नहीं चाहे वह सुकुमार सेन हो, चाहे आरके त्रिवेदी हो, वीएस रमादेवी हो, चाहे टीएन शेषन हो, चाहे एमएस गिल हो, या फिर नवीन चावला हो सबको जिस प्रकार कांग्रेस ने अपने कार्यकाल में उपकृत किया । किसी को राज्यपाल बनाया गया, किसी को मंत्री बनाया गया, किसी के ट्रस्ट को सहायता दी गई, किसी के भाई को सांसद बनाकर मंत्री बनाया गया, किसी को टिकट दिया गया।
+ आज एसआईआर पर कांग्रेस सवाल उठा रही है और इसी के नेता चाहे केरल सरकार के मंत्री रमेश चेन्निथला हो, केरल के ही विधायक मैथ्यू कुंजलनादन हो, कांग्रेस के सांसद और वरिष्ठ नेता शशि थरूर हो, तमिलनाडु के कांग्रेस नेता केजी अरुणराज हो, वे सब एसआईआर का समर्थन कर रहे हैं।
देश के 42 पूर्व न्यायाधीशों ने चुनाव आयोग की प्रक्रिया का समर्थन किया है।
मतदाता सूचियां में एक से अधिक जगह पर वोट देने वाले मतदाताओं के नाम जुड़े हुए हैं, मरे हुए लोगों के भी नाम लिखे हुए हैं यही सवाल कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के नेता करते थे आज जब वे नाम हटाए जा रहे हैं तो उन पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
+ आज देश रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की तरफ बढ़ रहा है आज हम यूरोप को हथियार बेचने वाले नंबर एक देश बने हैं, स्वदेशी युद्धपोत बना रहे हैं, विमान बना रहे हैं, दुनिया में हमारी धाक जम रही है।
अंतरिक्ष में हमारी ऊंची उड़ान है, चंद्रयान मिशन हो, मंगलयान मिशन हो, सूर्य मिशन हो, गगनयान हो, इसरो द्वारा 104 उपग्रह को एक साथ अंतरिक्ष में भेजने का विश्व रिकॉर्ड हो यह सब भारत की बढ़ती हुई ताकत का परिणाम है।
आज भारत पर कोई आक्रमण करने वाला अपने घर में बैठकर आनंदित नहीं हो सकता क्योंकि अब सरकार डोजियर नहीं भेजती, प्रमाण नहीं देती बल्कि उन्हें परिणाम भुगतने पर मजबुर करती है, और घर में घुसकर हमारी सेना मारती है।
दुनिया ने हमारे ऑपरेशन सिंदूर को देखा है यह हमारी ताकत, क्षमता और कुशल नेतृत्व का परिणाम है।
आत्मनिर्भर होते हुए भारत को बेपटरी करने के लिए एक गठजोड़ काम कर रहा है और कांग्रेस से उसका संबंध जगजाई हो रहा है, अभी हाल ही में प्रतिष्ठित फॉक्स पत्रिका ने एक रिसर्च कर बड़ा लेख लिखा उसमें स्पष्ट लिखा है कि दुनिया में जो अराजकता फैलाने वाले संगठन है उनके साथ कांग्रेस और कांग्रेस के नेताओं की सांठ-गांठ है।
देश की तरक्की, जनता का नेतृत्व में विश्वास कांग्रेस को हजम नहीं हो रहा है ऐसे लगता है इसलिए वह देश में अराजकता का माहौल बनाकर देश में लोकतंत्र पर सवालियां निशान लगाना चाहती है।
हमारे कांग्रेस से सीधे सवाल है
+ क्या कांग्रेस चाहती है कि जिन विदेशी घुसपैठियों का नाम देश की मतदाता सूची में लिख दिया गया है वह नहीं हटे?
क्या कांग्रेस चाहती है कि मृतकों और दूसरी जगह चले गए मतदाताओं के नाम पर कोई दूसरा वोट देकर अब तक देश में चल रही कांग्रेस की लूट को जारी रखे?
क्या कांग्रेस चाहती है कि देश का लोकतंत्र विदेशी ताकतें नियंत्रित करें?
+ क्या कांग्रेस अराजकता फैलाकर देश की तरक्की को रोकना चाहती है?
कांग्रेस देश की जनता को बताएं कि उसका चीन के साथ क्या समझौता है?
कांग्रेस यह बताएं की फोकस पत्रिका में जो अराजक संगठनों के साथ रेड ग्रीन गठजोड़ में उनका नाम आया है, क्या वह उस गठजोड़ का हिस्सा है?
कांग्रेस देश की जनता को यह स्पष्ट बताएं की एसआईआर यदि गलत है तो उससे पहले उसके कार्यकाल में हुई 10 एस आईआर पर उसका क्या मत है?
इस मौके पर सुमेरपुर नगरपालिका अध्यक्ष चत्रभुज शर्मा, तखतगढ नगर पालिका अध्यक्ष प्रतिनिधि मनोज नामा, सुमेरपुर नगर मंडल अध्यक्ष रविकांत रावल, भाजपा जिला उपाध्यक्ष पूनमसिंह परमार, जिला कार्यालय प्रभारी लक्ष्मणसिंह राजपुरोहित एवं अन्यजन उपस्थित रहे।





