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पाली-पाली के बूसी गांव के पास सुकड़ी नदी के कैचमेंट एरिया में बजरी खनन के लिए जारी दो लीज को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार, खनन विभाग, पाली जिला कलेक्टर और खनन पट्टाधारकों को नोटिस जारी किए हैं। अदालत ने सभी पक्षों से चार सप्ताह में जवाब मांगा है। मामला पर्याप्त रेत पुनर्भरण अवधि के बिना खनन लीज जारी करने और इससे नदी, भूजल तथा सार्वजनिक संपत्ति को संभावित नुकसान पहुंचने के आरोपों से जुड़ा है।
मुख्य न्यायाधीश संजय के. अग्रवाल और न्यायाधीश बलजिंदर सिंह संधू की खंडपीठ ने धनाराम उर्फ धनराज सोलंकी सहित किसानों और ग्रामीणों की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता राजेश परिहार और कुलदीप प्रजापत ने पक्ष रखा।
400 सिंचाई कुएं भूजल पुनर्भरण पर निर्भर
याचिका के अनुसार, सुकड़ी नदी के किनारे स्थित बूसी गांव की आबादी 9 हजार से अधिक है। ग्रामीणों के करीब 400 सिंचाई कुएं नदी से होने वाले भूजल पुनर्भरण पर निर्भर हैं। नदी के ऊपरी हिस्से में टेवाली और कोलार एनीकट होने के कारण बजरी का प्राकृतिक पुनर्भरण नहीं हो पा रहा है।
याचिकाकर्ताओं ने आशंका जताई कि नदी से बजरी हटाने पर भूजल स्तर गिर सकता है और 40 फीट से नीचे का पानी खारा हो सकता है। इससे खेती और पेयजल स्रोत प्रभावित होने का भी दावा किया गया है।
बिना लीज जारी करने का आरोप
याचिका में बताया गया कि मेसर्स चांडक एसोसिएट्स की खनन लीज 12 दिसंबर 2023 तक वैध थी। याचिकाकर्ताओं के अनुसार, लीज समाप्त होने के बाद कम से कम पांच साल का कूलिंग ऑफ पीरियड यानी पुनर्भरण अवकाश दिया जाना जरूरी था। आरोप है कि इसके बावजूद खनन विभाग ने 244.93 हेक्टेयर क्षेत्र के क्लस्टर में दो प्लॉट बनाकर नीलामी करवाई।
याचिका के मुताबिक, खनन लीज संख्या 123 के तहत 93.79 हेक्टेयर क्षेत्र के लिए 1.60 करोड़ रुपए और लीज संख्या 129 के तहत 98.70 हेक्टेयर क्षेत्र के लिए 3 करोड़ रुपए की बोली लगाई गई। इसके बाद 22 मई को मेसर्स थार माइंस के पक्ष में लीज जारी कर दी गई।
जनसुनवाई और एनीकट की पाल तोड़ने पर भी सवाल
याचिका में पर्यावरण स्वीकृति के लिए अप्रचलित समाचार पत्रों में विज्ञापन प्रकाशित करवाने और 25 जुलाई 2025 को हुई जनसुनवाई में केवल 27 लोगों की उपस्थिति दर्ज किए जाने पर सवाल उठाए गए हैं। ग्रामीणों ने 31 जुलाई 2025 को 14 बिंदुओं पर आपत्तियां दर्ज कराई थीं।
इसके बाद 15 जनवरी और 21 जून 2026 को आपात ग्राम सभाएं आयोजित कर खनन का पूर्ण बहिष्कार करने का निर्णय लिए जाने का उल्लेख भी याचिका में किया गया है। इसके बावजूद 25 फरवरी को एनओसी जारी किए जाने का आरोप लगाया गया है।
याचिका में यह भी आरोप है कि जून 2026 में डंपरों की आवाजाही के लिए एनीकट की पाल तोड़ दी गई। अब हाईकोर्ट के नोटिस के बाद संबंधित पक्षों को चार सप्ताह में जवाब पेश करना होगा। मामले में आगे की कार्रवाई उनके जवाब और अदालत के निर्देशों पर निर्भर करेगी।




