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खीमाराम मेवाडा
खबर का असर
दुजाना में चिन्हित ट्यूबवेल से गर्मियों में मिलेगा मीठा पानी– पटेल
नगर मे बनी गंभीर पेयजल समस्या को लेकर न.पा.अध्यक्ष पहुची जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी कार्यालय
वर्तमान पेयजल सप्लाई को लेकर विस्तार से जानकारी लेकर पेयजल व्यवस्था करने के दिए निर्देश
तखतगढ 1 अक्टूबर (खीमाराम मेवाडा) तखतगढ़ में पेयजल व्यवस्था को लेकर पूर्ववर्ती भाजपा बोर्ड का निर्णय अभी भी कस्बेवासियों के लिए परेशानी का कारण बनता दिखाई दे रहा है। के समाचार प्रकाशित होने के बाद गुरुवार को नवनिर्वाचित न.पा.अध्यक्ष जयश्री नामा अपने पति संग जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (PHED) सहायक अभियन्ता कार्यालय पहुची। नामा ने
नगरवासियों से लगातार मिल रही पेयजल की गंभीर समसयाओ की शिकायतो को लेकर सहायक अभियन्ता जितेन्द्र पटेल व कनिष्ठ अभियन्ता मेजर सिंह से वर्तमान पेयजल सप्लाई को लेकर विस्तार से जानकारी जुटाई जिस पर सहायक अभियंता पटेल ने जंवाई पाइपलाइन तथा तालाब के कुओं से मिश्रित पेयजल सप्लाई तखतगढ़ में हर चौथे दिन देने की जानकारी दी। पालिका अध्यक्ष ने कहा जब तक सरकार द्वारा प्रस्तावित 20 करोड की परियोजना की स्वीकृति प्राप्त नहीं हो तब तक आगामी गर्मियों के मौसम में पेयजल की पर्याप्त व्यवस्था का समाधान कैसे किया जाएगा। जिस पर
उनहोने आगामी गर्मी के मौसम मे दुजाना से ट्यूबवैल चिन्हित किए है। और आगामी गर्मी को लेकर प्लान बनाकर सरकार को भिजवाया दिया है। अब सिर्फ स्वीकृति का अभाव है। स्वीकृति मिलते ही दुजाना ट्यूबवेल से जवाई पाइपलाइन के जरिए तखतगढ़ में सप्लाई शुरू कर दी जाएगी। दरअसल राजस्थान प्रदेश की एकमात्र तखतगढ़ नगरपालिका ने वर्षों तक, यहां तक कि भयंकर अकाल के दौर में भी, कस्बे में पेयजल आपूर्ति व्यवस्था को संभाला लेकिन वही जिम्मेदारी
18 सितंबर 2025 को नगरपालिका द्वारा पेयजल व्यवस्था जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (PHED) को हस्तांतरित होने के बाद पेयजल समस्या लगातार गंभीर होती गई। और यह निर्णय तखतगढ़ के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो गया। की पहले कस्बे में एक दिन छोड़कर नियमित पेयजल सप्लाई होती थी। लेकिन अब सप्लाई का अंतर बढ़कर करीब 36 घंटे हो गया है। इससे आमजन को पानी के लिए भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जबकी
कि पिछले एक वर्ष से कैबिनेट मंत्री सहित भाजपा के जनप्रतिनिधियों द्वारा तखतगढ़ और सुमेरपुर की पेयजल व्यवस्था सुधारने के लिए करोड़ों रुपये के बजट और बड़ी योजनाओं की घोषणाएं की जा रही हैं। लेकिन धरातल पर उसका आज भी अपेक्षित असर दिखाई नहीं दे रहा है।




