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पाली-चाची की हत्या करने वाले भतीजे को कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। हत्यारे के काका ने ही उसे हत्या करते देखा था और मौके पर पहुंच कर सहयोगी की मदद से पकड़ा था। जमीनी विवाद में हुई इस हत्या में साढ़े 7 साल बाद कोर्ट का फैसला आया है।
पाली के सेशन न्यायालय ने दोषी मानते हुए आजीवन कठोर कारावास की सजा सुनाई। घटना साल 2018 में गुड़ा एंदला थाना क्षेत्र के बूसी गांव में हुई थी।
कोर्ट के लोक अभियोजक सुमेर सिंह राजपुरोहित ने बताया-मामले में पाली के सेशन न्यायाधीश राजेंद्र कुमार ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद सजा सुनाई है। फैसला 23 सितंबर 2026 को आया। जिसमें नरेश पुत्र लालाराम निवासी बूसी (गुड़ा एंदला) हाल पूना को लक्ष्मीदेवी का हत्या का दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा दी गई है।
हत्या करते पति ने देखा था
लोक अभियोजक सुमेरसिंह राजपुरोहित ने बताया- 23 दिसंबर 2018 को पाली जिले के गुड़ा एंदला थाना क्षेत्र के बूसी गांव के घीसू बा की बेरी निवासी खूमाराम (65) पुत्र घीसाराम ने गुड़ा एंदला थाने में रिपोर्ट दर्ज करवाई। जिसमें बताया कि 23 दिसंबर की सुबह वह दूध डेयरी पर देने गया था। वापस साढ़े 10 बजे घर पहुंचा तो नरेश पुत्र लालाराम निवासी बूसी हाल पूना ने उसकी पत्नी लक्ष्मीदेवी (60) पर धारदार हथियार और हथोड़े से वार कर रहा था।
वह लहूलुहान हालत में फर्श पर पड़ी थी। यह देख उन्होंने पास में रहने वाले जीवाराम को आवाज दी। दोनों ने मिलकर नरेश को पकड़ लिया और पुलिस को कॉल किया।पुश्तैनी जमीन का विवाद था
लोक अभियोजक राजपुरोहित ने बताया कि दोनों परिवारों में पुश्तैनी जमीन को लेकर विवाद था। 30 बीघा पुश्तैनी जमीन का बंटवारा हत्या की वजह बना। लक्ष्मी अपने पति के साथ यहां मकान बना कर रह रही थी। विवादित जमीन का मामला कोर्ट में चल रहा था।




