• March 27, 2026

बेंगलुरु में चैत्रीय नवरात्रि का भव्य समापन: चामुंडा माताजी मंदिर में श्रद्धा, भक्ति और उल्लास का अनुपम संगम

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बेंगलुरु में चैत्रीय नवरात्रि का भव्य समापन: चामुंडा माताजी मंदिर में श्रद्धा, भक्ति और उल्लास का अनुपम संगम

बेंगलुरु (दलपतसिंह भायल ) चैत्रीय नवरात्रि के पावन पर्व का समापन बेंगलुरु स्थित श्री चामुंडा माताजी के मंदिर प्रांगण में अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ भव्य रूप में संपन्न हुआ। नौ दिनों तक चली माँ दुर्गा की आराधना के पश्चात अंतिम दिवस पर आयोजित विशेष आरती ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया।

इस अवसर पर बड़ी संख्या में राजस्थानी प्रवासी मंडल के श्रद्धालु, समाजबंधु एवं माताजी के भक्तजन उपस्थित रहे, जिससे मंदिर परिसर पूरी तरह श्रद्धालुओं से भर गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ मंदिर के आचार्य द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार एवं विधि-विधान के साथ किया गया। मंत्रों की गूंज और घंटों की ध्वनि के बीच जब आरती प्रारंभ हुई, तो पूरा वातावरण भक्तिरस में सराबोर हो उठा।

श्रद्धालु माता के जयकारों के साथ भक्ति में लीन नजर आए और मंदिर परिसर “जय माता दी” के उद्घोष से गुंजायमान हो गया।
इस पावन अवसर पर लाभार्थी शेरसिंह राठौड़ अरणू परिवार को माँ नवदुर्गा की विशेष आरती करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। उन्होंने अपने परिवार सहित पूरे श्रद्धा भाव से माताजी के चरणों में आरती अर्पित कर आशीर्वाद प्राप्त किया। परिवार के सभी सदस्यों ने इस क्षण को अपने जीवन का सौभाग्य बताते हुए माँ के प्रति अपनी आस्था व्यक्त की।

नवरात्रि के इस अंतिम दिवस पर लाभार्थी परिवार द्वारा श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद स्वरूप अल्पाहार की सुंदर व्यवस्था भी की गई। भक्तों ने प्रसाद ग्रहण कर पुण्य लाभ प्राप्त किया और आयोजन की सराहना की। इस दौरान सेवा भाव और समर्पण का अद्भुत उदाहरण देखने को मिला।

कार्यक्रम में कर्नाटक राजस्थान राजपूत समाज के अनेक गणमान्य सदस्य भी उपस्थित रहे। इनमें विजयसिंहजी परमार, किशोरसिंह चौहान, हीरसिंह परमार, ओबसिंह चौहान, दलपतसिंह भायल, राजूसिंह झाला, प्रवीणसिंह राठौड़, डूंगरसिंह राठौड़, श्रीपालसिंह, हीर सिंह राठौड़, जितुसिंह, पहाड़सिंह, राजुभाई सहित सैकड़ों की संख्या में समाजबंधुओं एवं माताजी के भक्तों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।

पूरे आयोजन के दौरान भक्तों में अपार उत्साह, अनुशासन और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बना, बल्कि प्रवासी राजस्थानी समाज की एकता, संस्कृति और परंपराओं को भी मजबूती प्रदान करने वाला साबित हुआ।

इस भव्य और आध्यात्मिक आयोजन के साथ ही चैत्रीय नवरात्रि का समापन अत्यंत श्रद्धा और उल्लास के साथ हुआ, जो सभी श्रद्धालुओं के लिए एक अविस्मरणीय अनुभव बन गया।

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