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खीमाराम मेवाडा
सेवानिवृत्ति से महज 25 दिन पहले संसार से विदा हुए SSB के ASI छोगाराम मीणा
सशस्त्र सीमा बल के एएसआई छोगाराम मीणा का निधन के बाद पैतृक गांव पहुचा तिरंगे में लिपटा पार्थिव शरीर
बल के जवानों ने मातमी धुन के साथ साथ सलामी देकर राजकीय सम्मान से किया अंतिम संस्कार
तखतगढ 5 सितम्बर (खीमाराम मेवाडा) तखतगढ के समीप आहोर तहसील के पावटा निवासी एव सशस्त्र सीमा बल के सहयक उप निरीक्षक छोगाराम मीणा का शुक्रवार को जयपुर मे उपचार के दौरान निधन के बाद शनिवार को पार्थिव शरीर पैतृक गांव पावटा पहुचने पर जवानों ने मातमी धुन के साथ सलामी देकर राजकीय सम्मान से अंतिम संस्कार किया गया। प्राप्त जानकारी के अनुसार बताया गया की जालोर जिले की आहोर तहसील के पावटा निवासी छोगाराम मीणा 1994 मे सशस्त्र सीमा बल मे जवान के रूप मे भर्ती हुए थे।
सहयक उप निरीक्षक छोगाराम मीणा का अलवर के लक्ष्मणगढ़ में ओनड्यूटी के दौरान अचानक स्वास्थ्य बिगड़ने पर सशस्त्र सीमा बल के जवानों ने तुरन्त जयपुर अस्पताल में भर्ती कराया जहा उपचार के दौरान जयपुर अस्पताल में बल के सहयक उपनिरीक्षक मीणा का निधन होने पर शुक्रवार रात्रि को सशस्त्र सीमा बल के उप निरिक्षक महेश कुमार के सानिध्य में बल के जवान तिरंगे में लिपटा पार्थिव शरीर लेकर रात 11 बजे करीब जयपुर से तखतगढ़ पहुंचे शनिवार सुबह पैतृक गांव पावटा पहुचने पर इकलौते पुत्र एव परिजनो को अंतिम दर्शन के बाद परिजनों एवं समाज के लोगों के सानिध्य में पार्थिव शरीर को लेकर वेकुंट घाम पहुचे जहा सीमा बल के उप निरीक्षक महेश कुमार सहित जवानों ने वीर गति को पुष्पांजलि अर्पित कर सम्मान पूर्वक तिरंगे को सुरक्षित हटाकर मातमी धुन के साथ साथ सलामी देकर राजकीय सम्मान से अंतिम संस्कार किया गया।
16 वर्षीय बेटे ने दी पिता के चिता को मुखाग्नि
श्मशान घाट पर सशस्त्र बल के जवानों द्वारा मातमी धूम के साथ सलामी देने के बाद 16 वर्षीय इकलौते पुत्र जगदीश कुमार ने अपने पिता चिता को मुखाग्नि देकर राजकीय सम्मान के साथ जवानो ने अंतिम संस्कार करवाया। बाद बल के उप निरिक्षक महेश कुमार ने तिरंगे को सम्मान पूर्वक सुरक्षित अमर शहीद के बेटे जगदीश कुमार के हाथो सुपुर्द किया गया।
SSP फंड से 2.25 लाख रुपए तत्काल आर्थिक सहायता के लिए नकद दिए
सशस्त्र सीमा बल के उप निरीक्षक महेश कुमार द्वारा परिवार को 2.25 लाख रुपए तत्काल आर्थिक सहायता के लिए नकद दिए। उन्होने बताया की हमारे एसएसपी कर्मचारियों द्वारा कभी भी इस प्रकार की घटना होने पर ₹ 25000 तक का अंतिम संस्कार के लिए दिए जाते हैं। और एसएसपी फंड से तत्काल आर्थिक सहायता के लिए दिए जाते हैं। अन्य जो फायदे तो आते रहेंगे।
जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारीयो के नही पहुंचना बना चर्चा का विषय
पावटा के निवासी और अमर शहीद छोगाराम मीणा का पार्थिव शरीर शनिवार को पैतृक गांव पहुंचने पर शमशान घाट पर अंतिम संस्कार के दौरान उमेदपुर पुलिस चौकी के अलावा क्षेत्र का एक भी जन्मप्रतिनिधि या प्रशासनिक अधिकारियों के नहीं पहुंचने पर चर्चा का विषय बना रहा
सेवानिवृत्ति से महज 25 दिन पहले संसार से विदा हुए SSB के ASI छोगाराम मीणा
तखतगढ़/पावटा। देशसेवा को अपना सर्वोच्च कर्तव्य मानकर सशस्त्र सीमा बल (SSB) में अपनी सेवाएं देने वाले सहायक उपनिरीक्षक (ASI) छोगाराम मीणा का ड्यूटी के दौरान तबीयत बिगड़ने से निधन हो गया। उनके निधन की खबर से परिवार सहित पावटा गांव और आसपास के क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। जैसे ही उनका पार्थिव देह गांव पहुंचा, माहौल पूरी तरह गमगीन हो गया। ग्रामीण अपने वीर सपूत की अंतिम झलक पाने के लिए उमड़ पड़े। नम आंखों से ग्रामीणों ने अपने गांव के उस सपूत को श्रद्धांजलि दी, जिसने जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा देश की सुरक्षा और सेवा में समर्पित कर दिया।
पत्नी, तीन बेटियां और एक बेटा छोड़ गए पीछे
छोगाराम मीणा अपने पीछे पत्नी, तीन बेटियां और एक बेटा जगदीश सहित भरा-पूरा परिवार छोड़ गए। परिवार के अनुसार उनकी दो बेटियों के हाथ पीले हो चुके थे, जबकि एक बेटी और एक बेटा अभी अविवाहित हैं। सबसे छोटा बेटा जगदीश कुमार महज 16 वर्ष का है।
परिवार के लिए यह क्षण बेहद पीड़ादायक है। जिस पिता के सहारे बच्चों ने अपने भविष्य के सपने संजोए थे, वही पिता अचानक उन्हें छोड़कर हमेशा के लिए विदा हो गए।
30 सितंबर को होने वाली थी सेवानिवृत्ति, लेकिन नियति को कुछ और मंजूर था छोगाराम मीणा ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के लिए आवेदन कर रखा था और आगामी 30 सितंबर को सेवानिवृत्त होने वाले थे। वर्षों तक देश की सेवा करने के बाद अब वे परिवार के साथ शेष जीवन बिताने की तैयारी में थे। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। सेवानिवृत्ति से महज 25 दिन पहले ही उन्होंने इस संसार को अलविदा कह दिया। जिस सेवानिवृत्ति का परिवार इंतजार कर रहा था, वह खुशी का अवसर आने से पहले ही मातम में बदल गया। देशसेवा के अंतिम पड़ाव पर पहुंचे छोगाराम मीणा का अचानक चले जाना परिवार और क्षेत्र के लिए कभी न भरने वाली कमी छोड़ गया।
देशसेवा हमेशा याद रखेगा गांव
छोगाराम मीणा का जीवन कर्तव्य, अनुशासन और देशसेवा के प्रति समर्पण का प्रतीक रहा। सशस्त्र सीमा बल में रहते हुए उन्होंने राष्ट्र की सुरक्षा के लिए अपनी जिम्मेदारियां निभाईं।
उनकी अंतिम यात्रा में उमड़ा जनसैलाब इस बात का गवाह रहा कि देश के लिए अपना जीवन समर्पित करने वाले वीर जवान को समाज कभी नहीं भूलता।





