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पोस मशीन का टेंडर आचार संहिता में फंसा, 4.34 करोड़ लाभार्थियों के गेहूं वितरण पर संकट

Pintu Aggarwal by Pintu Aggarwal
August 31, 2026
in Local
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पोस मशीन का टेंडर आचार संहिता में फंसा, 4.34 करोड़ लाभार्थियों के गेहूं वितरण पर संकट

PALI SIROHI ONLINE

जयपुर-जयपुर। प्रदेश में खाद्य सुरक्षा योजना के तहत करोड़ों लाभार्थियों को मिलने वाले गेहूं के वितरण पर आने वाले दिनों में संकट खड़ा हो सकता है। प्रदेश की करीब 27 हजार राशन दुकानों पर गेहूं वितरण और लाभार्थियों के सत्यापन में इस्तेमाल होने वाली पोस (पॉइंट ऑफ सेल) मशीनों के रखरखाव का टेंडर चुनाव आचार संहिता में फंस गया है। मौजूदा रखरखाव फर्म की अवधि 4 सितंबर को समाप्त हो रही है। ऐसे में यदि समय रहते नई व्यवस्था नहीं हुई तो मशीन खराब होने की स्थिति में राशन वितरण प्रभावित हो सकता है।

रोजाना आती हैं करीब 600 शिकायतें
विभागीय स्तर पर पोस मशीनों में तकनीकी खराबी की रोजाना करीब 600 शिकायतें सामने आती हैं। मौजूदा फर्म द्वारा इन मशीनों को ठीक किया जाता है। पोस मशीन के साथ आईरिस स्कैनर और वेइंग मशीन से जुड़ी तकनीकी समस्याओं का समाधान भी इसी व्यवस्था के तहत किया जाता है।अब 4 सितंबर के बाद यदि नया टेंडर नहीं होता है और किसी राशन दुकान की पोस मशीन खराब हो जाती है तो लाभार्थी का अनिवार्य सत्यापन नहीं हो पाएगा। ऐसी स्थिति में डीलर गेहूं का वितरण नहीं कर सकेगा। इससे राशन की दुकानों पर लाभार्थियों और डीलरों के बीच विवाद की स्थिति भी बन सकती है।

बिना पोस के गेहूं बांटा तो गबन माना जाएगा
विभाग के उच्च अधिकारियों के अनुसार खाद्य सुरक्षा योजना में गेहूं वितरण की प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए पोस मशीन का इस्तेमाल अनिवार्य है। ऐसे में यदि कहीं बिना पोस मशीन के गेहूं का वितरण किया जाता है तो उसे गंभीर अनियमितता मानते हुए गबन की श्रेणी में माना जा सकता है। इससे डीलरों के सामने भी स्थिति पेचीदा हो सकती है।

निजी कंपनी के निशुल्क रखरखाव ऑफर से चर्चा
इसी बीच करीब चार दिन पहले जिला रसद अधिकारियों के मोबाइल पर एक पोस्टर मैसेज पहुंचा। इसमें एक निजी कंपनी की ओर से राशन डीलरों को पोस मशीन, आईरिस स्कैनर और वेइंग मशीन खराब होने पर निशुल्क रिपेयरिंग और तकनीकी सपोर्ट देने की पेशकश की गई है। इसके बाद विभाग में इस बात को लेकर चर्चा शुरू हो गई है कि बिना किसी टेंडर के निजी कंपनी राशन डीलरों को मशीनों के रखरखाव की सुविधा देने का ऑफर किस आधार पर दे रही है।

4.34 करोड़ लाभार्थियों को मिलता है गेहूं
खाद्य सुरक्षा योजना के तहत प्रदेश में करीब 4.34 करोड़ लाभार्थी शामिल हैं। प्रत्येक लाभार्थी को हर माह 5 किलो गेहूं दिया जाता है। इस हिसाब से प्रदेश में हर महीने करीब 2.20 लाख मीट्रिक टन गेहूं का वितरण किया जाता है। इसके लिए पूरे राजस्थान में करीब 27 हजार राशन दुकानें संचालित हैं, जबकि अकेले जयपुर जिले में करीब 1200 राशन दुकानें हैं। ऐसे में पोस मशीनों की तकनीकी व्यवस्था प्रभावित होने का सीधा असर करोड़ों लाभार्थियों के गेहूं वितरण पर पड़ सकता है।

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