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खीमाराम मेवाडा
गुजरात में आयुष्मान योजना से प्रवासियों को वंचित होने से छगन घांची की शिकायत पर मुख्यमंत्री कार्यालय ने लिया संज्ञान
गुजरात में आयुष्मान योजना लागू कराने की मांग पर 7 दिन में रिपोर्ट तलब
तखतगढ़ 23 जुलाई (खीमाराम मेवाडा) गुजरात प्रांत में पश्चिमी राजस्थान के सीमावर्ती क्षेत्रों के लाखों लोगों के लिए अब राहत की उम्मीद जगी है। मुख्यमंत्री कार्यालय ने राजस्थान के आयुष्मान आरोग्य योजना का लाभ गुजरात राज्य के सूचीबद्ध अस्पतालों में उपलब्ध करवाने की मांग पर गंभीरता से संज्ञान लेते हुए संबंधित विभाग को प्रकरण भेज दिया है तथा सात दिवस के भीतर तथ्यात्मक रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। आपको बता दे कि
यह कार्रवाई तखतगढ़ गौरव पथ निवासी छगन लाल घांची द्वारा मुख्यमंत्री को भेजे गए प्रार्थना-पत्र के बाद हुई है। मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा जारी पत्र में राजस्थान स्टेट हेल्थ एश्योरेंस एजेंसी (RSHA) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी को निर्देशित किया गया है कि आवेदन में वर्णित तथ्यों की जांच कर नियमानुसार आवश्यक कार्यवाही करते हुए सात दिनों के भीतर वस्तुस्थिति से मुख्यमंत्री कार्यालय को अवगत कराया जाए।
सीमावर्ती जिलों के लाखों परिवारों का जुड़ा है हित
प्रार्थना-पत्र में बताया गया था कि पश्चिमी राजस्थान के पाली, सिरोही, जालोर, बाड़मेर, जैसलमेर सहित कई जिले गुजरात राज्य की सीमा से लगे हुए हैं। इन क्षेत्रों के नागरिक छोटी-बड़ी बीमारियों से लेकर गंभीर उपचार तक के लिए वर्षों से गुजरात के अस्पतालों पर निर्भर रहते हैं। लेकिन राजस्थान की आयुष्मान आरोग्य योजना का लाभ गुजरात के अधिकांश अस्पतालों में उपलब्ध नहीं होने के कारण गरीब एवं मध्यमवर्गीय परिवारों को लाखों रुपये अपनी जेब से खर्च करने पड़ते हैं।
योजना लागू होने से मिलेगा सीधा लाभ
यदि राजस्थान सरकार गुजरात के सूचीबद्ध अस्पतालों में भी आयुष्मान आरोग्य योजना लागू करती है, तो सीमावर्ती क्षेत्रों के लाखों परिवारों को बेहतर एवं समय पर उपचार मिल सकेगा। साथ ही गंभीर बीमारियों के इलाज में आर्थिक बोझ भी काफी हद तक कम होगा।
मुख्यमंत्री कार्यालय की पहल से बढ़ी उम्मीद
मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा प्रकरण को संबंधित विभाग को भेजकर सात दिनों में रिपोर्ट तलब किए जाने के बाद अब सीमावर्ती जिलों के लोगों की उम्मीदें बढ़ गई हैं। क्षेत्रवासियों का मानना है कि यदि इस दिशा में सकारात्मक निर्णय लिया जाता है तो यह राजस्थान के लाखों नागरिकों के लिए एक ऐतिहासिक और जनहितकारी कदम साबित होगा। अब सभी की निगाहें राजस्थान स्टेट हेल्थ एश्योरेंस एजेंसी की रिपोर्ट तथा राज्य सरकार के आगामी निर्णय पर टिकी हुई हैं।

