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जालोर-जिला उपभोक्ता आयोग ने भारतीय जीवन बीमा निगम को एक महिला का 4 लाख रुपए का बीमा क्लेम भुगतान करने का आदेश दिया है। आयोग ने माना कि बीमा कंपनी ने बिना पर्याप्त आधार के दावा खारिज किया, जो उपभोक्ता के प्रति सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार है।
जालोर निवासी मंजू देवी ने जिला उपभोक्ता आयोग में वाद दायर किया था कि उनके पति रमेश कुमार ने एलआईसी की 2 जीवन बीमा पॉलिसियां ले रखी थीं। अगस्त 2024 में हार्ट अटैक से उनकी मृत्यु के बाद मंजू देवी ने दोनों पॉलिसियों का क्लेम किया। कंपनी ने एक पॉलिसी का भुगतान कर दिया, लेकिन दूसरी 4 लाख रुपए की पॉलिसी का दावा यह कहते हुए खारिज कर दिया कि बीमित व्यक्ति ने पहले से मौजूद बीमारी की जानकारी छिपाई थी।
आयोग ने सुनवाई के दौरान पाया कि बीमा कंपनी यह साबित नहीं कर सकी कि पॉलिसी जारी करते समय बीमित ने कोई तथ्य छिपाया था। रिकॉर्ड में उपलब्ध चिकित्सा दस्तावेजों के अनुसार मौत का कारण कार्डियक अरेस्ट (हार्ट अटैक) था। इस पर सुनवाई कर रहे आयोग के अध्यक्ष घनश्याम यादव और सदस्य ने बिना उचित कारण क्लेम अस्वीकार करना सेवा में कमी मानते हुए आदेश दिया कि वह 45 दिन के भीतर 4 लाख रुपए की बीमा राशि का भुगतान करे। साथ ही 16 जून 2025 से भुगतान तक 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी दे। इसके अलावा मानसिक व शारीरिक कष्ट और आर्थिक क्षति के लिए 30 हजार रुपए और मुकदमा खर्च के रूप में 5 हजार रुपए भी अदा करने होंगे। निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं होने पर इन राशियों पर भी 9 प्रतिशत ब्याज देना होगा।


