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खीमाराम मेवाडा
उच्च जोखिम गर्भावस्था की समय पर पहचान से मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में आएगी कमी : डॉ. गोविन्द सिंह चुण्डावत
तखतगढ 20 जुलाई (खीमाराम मेवाडा) चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग, राजस्थान के निर्देशानुसार मातृ एवं नवजात मृत्यु दर में कमी लाने तथा उच्च जोखिम गर्भावस्था (हाई रिस्क प्रेगनेंसी-एचआरपी) वाली गर्भवती महिलाओं की समय पर पहचान, प्रभावी प्रबंधन एवं सुरक्षित संस्थागत प्रसव सुनिश्चित करने के उद्देश्य से सोमवार को नगरपालिका सभागार, सुमेरपुर में ब्लॉक स्तरीय एएनएम प्रशिक्षण का आयोजन किया गया। प्रशिक्षण में ब्लॉक क्षेत्र की सभी एएनएम, एलएचवी ने भाग लिया।
ब्लॉक मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. गोविन्द सिंह चुण्डावत ने प्रशिक्षण को संबोधित करते हुए कहा कि मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को न्यूनतम स्तर पर लाने के लिए प्रत्येक गर्भवती महिला की प्रथम प्रसवपूर्व जांच (एएनसी) से ही उच्च जोखिम गर्भावस्था की पहचान करना अत्यंत आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि गंभीर एनीमिया, उच्च रक्तचाप, गर्भकालीन मधुमेह, थायरॉइड विकार, पूर्व सिजेरियन, जुड़वां गर्भ, प्लेसेंटा संबंधी जटिलताओं तथा अन्य चिकित्सीय जोखिमों की समय रहते पहचान कर उचित उपचार एवं समयबद्ध रेफरल सुनिश्चित करने से प्रसव संबंधी जटिलताओं एवं मातृ मृत्यु के मामलों में प्रभावी कमी लाई जा सकती है। उन्होंने सभी एएनएम को निर्देशित किया कि प्रत्येक गर्भवती महिला की नियमित जांच, जोखिम आधारित वर्गीकरण एवं गुणवत्तापूर्ण मातृ स्वास्थ्य सेवाएं प्राथमिकता के आधार पर उपलब्ध कराई जाएं
प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को विभाग द्वारा जारी नवीन एचआरपी एसओपी, उत्तरदायित्व निर्धारण, ट्रैकिंग प्रणाली, रेफरल व्यवस्था, माइक्रो मॉनिटरिंग एवं सुरक्षित मातृत्व कार्यक्रम के विभिन्न पहलुओं की जानकारी प्रदान की गई। प्रशिक्षण के अंत में सभी स्वास्थ्यकर्मियों से अपने-अपने कार्यक्षेत्र में उच्च जोखिम गर्भवती महिलाओं की शत-प्रतिशत पहचान, समयबद्ध उपचार, नियमित फॉलोअप एवं सुरक्षित संस्थागत प्रसव सुनिश्चित करने का आह्वान किया गया।
ब्लॉक कार्यक्रम अधिकारी प्रमोद कुमार गिरी ने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान उच्च जोखिम गर्भावस्था की पहचान, आरसीएच पोर्टल पर समयबद्ध ऑनलाइन प्रविष्टि, रेड फ्लैगिंग, माइक्रो मॉनिटरिंग, बर्थ माइक्रोप्लान तैयार करने, नियमित फॉलोअप, गृह भ्रमण, संस्थागत प्रसव की पूर्व तैयारी, एम्बुलेंस समन्वय, समयबद्ध रेफरल एवं गर्भवती महिलाओं की सतत ट्रैकिंग के संबंध में विस्तृत जानकारी दी गई। उन्होंने कहा कि प्रत्येक एएनएम अपने कार्यक्षेत्र की प्रत्येक गर्भवती महिला का शत-प्रतिशत पंजीकरण सुनिश्चित करें तथा किसी भी उच्च जोखिम वाली गर्भवती को बिना विलंब उचित स्वास्थ्य संस्था तक पहुंचाना विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता है। विभाग द्वारा जारी मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के अनुसार प्रत्येक उच्च जोखिम गर्भवती महिला की नियमित निगरानी एवं फॉलोअप सुनिश्चित किया जाएगा।
वरिष्ठ तकनीकी सहायक बिंजा राम मीणा ने प्रशिक्षण के दौरान बताया कि एएनएम द्वारा प्रत्येक एएनसी विजिट पर हीमोग्लोबिन, ब्लड प्रेशर, यूरिन एल्ब्यूमिन तथा भ्रूण की स्थिति सहित आवश्यक क्लीनिकल पैरामीटर की जांच अनिवार्य रूप से की जाएगी।
प्रशिक्षण मे मोहित कुमार इमरान खा खुशबु सिंह प्रवीणा कुमारी रौनक़ कुमार केनाराम देवासी सहित ब्लॉक क्षेत्र के समस्त एएनएम उपस्थिति रही


