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जालोर-जालोर और सिरोही तक माही परियोजना का पानी पहुंचाने की योजना को गति देने की कवायद तेज हो गई है। इसके तहत अनास, सोम, कमला और साबरमती नदियों के पानी को क्षेत्र तक लाने, पानी के भंडारण की व्यवस्था विकसित करने, बांधों की ऊंचाई बढ़ाने और जवाई, कृष्णावती सहित लूनी बेसिन की नदियों को पुनर्जीवित करने के विकल्पों पर विचार किया गया। साथ ही इन महत्वपूर्ण सुझावों को परियोजना की डीपीआर में शामिल करने पर सहमति बनी।इस संबंध में रविवार को सिरोही के सांसद जन सुविधा केंद्र में सांसद लुंबाराम चौधरी की मौजूदगी में बैठक आयोजित हुई।
पानी के भंडारण और नदियों को पुनर्जीवित करने पर चर्चा
बैठक में पानी के भंडारण के लिए उपयुक्त स्थानों की पहचान, मौजूदा बांधों की ऊंचाई बढ़ाने और जालोर-सिरोही की सूख चुकी नदियों को दोबारा जीवंत करने के तकनीकी पहलुओं पर विचार-विमर्श किया गया। इसके अलावा जवाई, कृष्णावती और लूनी बेसिन की अन्य नदियों तक पानी पहुंचाने की संभावनाओं पर भी विस्तार से मंथन हुआ।डीपीआर में शामिल होंगे महत्वपूर्ण सुझाव
बैठक में परियोजना से जुड़े विभिन्न तकनीकी और क्षेत्रीय सुझावों पर चर्चा के बाद उन्हें डीपीआर में शामिल कराने पर सहमति बनी, ताकि योजना को अधिक प्रभावी और व्यावहारिक बनाया जा सके।
किसान संगठन और सिंचाई विभाग के अधिकारी रहे मौजूद
बैठक में भारतीय किसान संघ के जालोर जिलाध्यक्ष रतन सिंह, प्रांत युवा प्रमुख खीम सिंह, संभाग उपाध्यक्ष गणेशाराम, जिला मंत्री जगाराम, तहसील अध्यक्ष चक्रवर्ती सिंह, चेलाराम, अमराराम, सिरोही जिलाध्यक्ष मावाराम चौधरी, संभाग मंत्री सुजान सिंह, केसाराम पुरोहित सहित सिंचाई विभाग के माही परियोजना के अधीक्षण अभियंता प्रकाश कुमार, जालोर के अधिशासी अभियंता विजेश कुमार, सहायक अभियंता महेंद्र और अन्य अधिकारी मौजूद रहे।


