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सिरोही-रामझरोखा मंदिर संपत्ति मामले में डीजीपी का जांच आदेशः पूर्व विधायक संयम लोढ़ा ने एसआईटी गठित करने की मांग की

Pintu Aggarwal by Pintu Aggarwal
July 17, 2026
in Local
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PALI SIROHI ONLINE

सिरोही-रामझरोखा मंदिर न्यास की संपत्तियों में कथित अनियमितताओं का मामला अब पुलिस मुख्यालय तक पहुंच गया है।

पूर्व मुख्यमंत्री सलाहकार संयम लोढ़ा ने पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) राजीव शर्मा से मुलाकात कर मंदिर की संपूर्ण संपत्तियों की सुरक्षा और संरक्षण के लिए विशेष जांच दलएसआईटी) गठित करने की मांग की।

डीजीपी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सिरोही एसपी को व्यक्तिगत निगरानी में पूरे प्रकरण और मंदिर की संपत्तियों की जांच कर संरक्षण सुनिश्चित करने तथा दोषियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

मुख्यमंत्री के जांच आदेश में ढिलाई का आरोप

लोढ़ा ने डीजीपी को बताया कि मुख्यमंत्री की ओर से मार्च 2023 में जिला कलेक्टर सिरोही को भेजे गए जांच आदेश पर अब तक प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।

उनका आरोप है कि जांच में बरती गई ढिलाई से आमजन की आस्था प्रभावित हुई है और मंदिर न्यास की व्यवस्था में अनियमितताएं बढ़ी हैं।

केवल जमीन नहीं, पूरी संपत्ति की सुरक्षा का मामला

लोढ़ा ने कहा कि मामला सिर्फ मंदिर भूमि के कथित अवैध विक्रय तक सीमित नहीं है, बल्कि मंदिर प्रन्यास की संपूर्ण चल-अचल संपत्तियों की सुरक्षा और श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा गंभीर विषय है।

उन्होंने एसआईटी से स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराने तथा अवैध विक्रय, षड्यंत्र और अन्य अनियमितताओं में शामिल सभी लोगों की भूमिका की जांच कर कानूनी कार्रवाई की मांग की।

जांच पूरी होने तक संपत्तियों पर रोक लगाने की मांग

लोढ़ा ने मांग की कि जांच पूरी होने तक मंदिर प्रन्यास की किसी भी चल-अचल संपत्ति के विक्रय, स्थानांतरण, नामांतरण या अन्य किसी भी प्रकार के हस्तक्षेप पर तत्काल रोक लगाई जाए, ताकि संपत्तियों को किसी प्रकार की क्षति न पहुंचे।

देवस्थान नियमों और हाईकोर्ट के आदेश का हवाला

उन्होंने बताया कि रामझरोखा मंदिर प्रन्यास देवस्थान बोर्ड, जोधपुर में पंजीकृत न्यास है और इसकी अचल संपत्तियां विभाग की अनुमति के बिना हस्तांतरित नहीं की जा सकतीं।

उन्होंने राजस्थान हाईकोर्ट के 24 अप्रैल के आदेश का हवाला देते हुए कहा कि विक्रय की राशि मंदिर को नहीं, बल्कि देवस्थान विभाग के खाते में जमा होनी चाहिए। साथ ही 75 लाख रुपए के नकद लेनदेन की आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 269ST के तहत भी जांच आवश्यक है, जो अब तक नहीं हुई।

जब्ती और रिसीवर नियुक्त करने की भी उठाई मांग

लोढ़ा ने कहा कि आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध होने के बावजूद जिला कलेक्टर स्तर पर जब्ती की कार्रवाई नहीं की गई, जो कानून के विपरीत है।

उन्होंने मंदिर प्रन्यास की संपत्तियों के संरक्षण के लिए सक्षमअधिकारी द्वारा रिसीवर नियुक्त करने की मांग भी उठाई, ताकि किसी भी प्रकार की क्षति या संपत्ति के दुरुपयोग को रोका जा सके।

जांच आदेश की प्रति भी सौंपी

लोढ़ा ने मुख्यमंत्री के विशेष सचिव की ओर से 30 मार्च को जारी जांच आदेश की प्रति भी डीजीपी को सौंपी। इसके बाद डीजीपी ने सिरोही पुलिस अधीक्षक को पूरे मामले की व्यक्तिगत निगरानी में जांच कर मंदिर की संपत्तियों का संरक्षण सुनिश्चित करने और दोषियों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए।

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