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सिरोही। राजस्थान में पंचायत और नगरीय निकाय चुनावों को लेकर एक बार फिर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया है। राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा 31 जुलाई 2026 तक चुनाव संपन्न नहीं कराने पर याचिकाकर्ता सिरोही के पूर्व विधायक संयम लोढ़ा ने सोमवार को राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर पीठ में अवमानना याचिका दायर की है।
हाईकोर्ट ने 22 मई 2026 को दिए अपने फैसले में स्पष्ट निर्देश दिए थे कि ग्राम पंचायतों और नगर निकायों सहित सभी स्थानीय निकायों के चुनाव 31 जुलाई 2026 तक संपन्न कराए जाएं। इसके बावजूद अब तक चुनावों की तारीखों का ऐलान नहीं किया गया है।
पंचायतों और शहरी निकायों में आरक्षण की स्थिति अभी स्पष्ट नहीं
याचिका में राज्य निर्वाचन आयोग, पंचायती राज विभाग और स्वायत्त शासन विभाग के वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों को प्रतिवादी बनाया गया है। 22 मई के फैसले में हाईकोर्ट ने नगरीय निकायों में वार्डों के परिसीमन और मतदाता सूची पुनरीक्षण का कार्य 20 जून 2026 तक पूरा करने का भी निर्देश दिया था, लेकिन पंचायतों और शहरी निकायों में आरक्षण की स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है।
राज्य सरकार के स्वायत्त शासन विभाग ने 15 जून को ओबीसी आयोग के सचिव को पत्र लिखकर नगरीय निकायों में अति पिछड़ा वर्ग के आरक्षण से संबंधित जानकारी मांगी थी। इस पत्र में कहा गया था कि विभिन्न वर्गों यथा अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग एवं महिला वर्ग के पदों के आरक्षण की सूचना पिछड़ा आयोग की रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद ही राज्य निर्वाचन आयोग को भेजी जा सकेगी।
याचिका में यह भी कहा गया है कि अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया था कि राजस्थान अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) आयोग की रिपोर्ट का इंतजार किए बिना चुनाव कराए जाएं और आयोग की रिपोर्ट में देरी चुनाव टालने का आधार नहीं बन सकती। इसके बावजूद राज्य सरकार और संबंधित विभाग लगातार ओबीसी आयोग की रिपोर्ट और ट्रिपल टेस्ट प्रक्रिया का हवाला देते रहे हैं।


