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सांचौर-जिला अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर में डॉक्टरों की सतर्कता और समय पर किए गए निदान से तीन वर्षीय मासूम की जान बच गई। बच्चे की सांस की नली में फंसी सुपारी का पता सीटी स्कैन जांच में चला। इसके बाद उसे जोधपुर रेफर किया गया, जहां बिना बड़े ऑपरेशन के सफल उपचार किया गया।
धमाणा गांव निवासी तीन वर्षीय भजनलाल पुत्र रमेश कुमार मेघवाल पिछले दो दिनों से सांस लेने में तकलीफ से जूझ रहा था। परिजन उसे उपचार के लिए सांचौर ट्रॉमा सेंटर लेकर पदंत्चे।यहां रेडियोलॉजिस्ट डॉ. सुखदेव ने बच्चे की स्थिति का गहन मूल्यांकन किया और परिजनों से विस्तृत जानकारी ली। बातचीत के दौरान पता चला कि खेलते समय बच्चे ने संभवतः सुपारी का टुकड़ा निगल लिया था। इससे डॉक्टरों को श्वसन नली में बाहरी वस्तु फंसने का संदेह हुआ।
सीटी स्कैन में सामने आई वजह
डॉक्टरों ने बच्चे का सीटी चेस्ट कराया, जिसमें सांस की नली की एक शाखा में सुपारी का टुकड़ा फंसा हुआ स्पष्ट दिखाई दिया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए उसे तत्काल जोधपुर के मथुरादास माथुर अस्पताल रेफर किया गया।
जोधपुर में विशेषज्ञ डॉक्टरों ने ब्रोंकोस्कोपी तकनीक की मदद से बिना किसी बड़े ऑपरेशन के श्वसन नली से सुपारी का टुकड़ा सफलतापूर्वक निकाल दिया। उपचार के बाद बच्चे की तबीयत सामान्य हो गई और अब वह पूरी तरह स्वस्थ है।
डॉक्टर बोले- ऐसे लक्षणों को नजरअंदाज न करें
रेडियोलॉजिस्ट डॉ. सुखदेव ने बताया कि छोटे बच्चों की सांस की नली में कोई वस्तु फंसने पर अचानक तेज खांसी, सांस लेने में कठिनाई, सीटी जैसी आवाज आना या घुटन जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। ऐसे संकेतों को सामान्य सर्दी-खांसी समझकर नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है। समय पर जांच और उपचार से गंभीर स्थिति से बचा जा सकता है।अभिभावकों से सावधानी बरतने की अपील
जिला अस्पताल के पीएमओ डॉ. बाबूलाल ने अभिभावकों से बच्चों को सुपारी, मूंगफली, सिक्के और अन्य छोटी कठोर वस्तुओं से दूर रखने की अपील की।
वहीं बच्चे के पिता रमेश कुमार मेघवाल ने ट्रॉमा सेंटर के डॉक्टरों और मेडिकल टीम का आभार जताते हुए कहा कि समय पर सही जांच और उपचार मिलने से उनके बेटे की जान बच सकी। उन्होंने बताया कि खेलते समय अन्य बच्चों ने गलती से उनके बेटे को सुपारी दे दी थी।


