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श्रीशारदा पीठ द्वारका में वंशावली संरक्षण एवं संवर्धन संस्थान के बेनर तले राजस्थान और गुजरात के करिब 200 वंश लेखकों का बहुमान जगत गुरु शंकराचार्य स्वामी श्री सदानंद सरस्वती जी महाराज के आदेश पर किया गया
ब्रह्मचरी नारायणा नंद के सानिध्य में राजस्थान और गुजरात से आये वंश लेखकों का स्वागत किया चंडिसा राव समाज के इस बही पुजन
कार्यक्रम के आयोजक किशोर भाई धानेरा ने बताया कि चंडिसा राव समाज के बंधु बस द्वारा द्वारिका के शारदीय पीठ पहुंचे जहां पर जगत गुरु शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती द्वारा वंश पुराण की बही का पुजन किया गया
बही पुजन कार्यक्रम के उद्बोधन में जगत गुरु शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती ने कहा कि वंशलेखन सनातन संस्कृति का अमुल्य अंग है जिसने हमें हमारे पुरातन काल से जोडे रखा है अनादि काल से सनातन धर्म और संस्कृति का पोषण किया है हमारी संस्कृति का इतिहास इन्ही के पास संरक्षित है वर्तमान में विलुप्त होती वंशलेखन का संरक्षण करना आवश्यक है सभी सनातनी हिन्दू धर्म के सभी जातीं बिरादरी अपने पुर्वजो का सम्मान मे पोथी वाचन करने का आव्हान किया और राव बारोट की बहीयो मे अपने परिवार का नाम दर्ज करने और उनका सम्मान और दान दक्षिणा दें ने संबंधित द्वारिका के शारदा पीठ से पत्र जारी किया कार्यक्रम का आयोजन शंभु दान राव किशोर भाई धानेरा और करणीदान राव की तीन सदस्यीय समिति ने किया जिसमें 200 चण्डीसा राव समाज के वंशलेखक ने भाग लिया

