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खीमाराम मेवाडा
तखतगढ़ नगर में स्वच्छता के नाम पर कलंक,स्वच्छता अभियान की पोल खोलते सार्वजनिक सुविधा केंद्र
पुराने बस स्टैंड से नए बस स्टैंड तक बदहाली के आंसू बहाते, लाखों खर्च के बावजूद आमजन को नहीं मिल रहीं मूलभूत सुविधाएँ
तखतगढ 16 फरवरी (खीमाराम मेवाडा) तखतगढ़ नगर पालिका में जब-जब नया बोर्ड बनते ही सबसे पहले नगर को स्वच्छता की ओर रेकिंग लाने के लिए नगर में बने सभी सुविधा केंद्रो की ओर रुख अपनाते हैं। उन पर बिना बोर्ड स्वीकृति ही लाखों रुपए खर्च किए जाते हैं। चीन की कमाई बोर्ड बनते ही यही से शुरू हो जाती है। वर्तमान में इन दिनों देशभर में चल रहे स्वच्छ भारत मिशन के तहत राज्य सरकार द्वारा भले ही स्वच्छता को लेकर बड़े दावे किए जा रहे हैं। लेकिन तखतगढ़ कस्बे की स्थिति इन दावों की हकीकत बयान कर रही है। जो की नगर के पुराने और नए बस स्टैंड पर पालिका द्वारा संचालित सुविधा केंद्र के नाम सुलभ शौचालय और मूत्रालय रखरखाव के अभाव में पूरी तरह बदहाल अवस्था में दिखाई दे रहे हैं। जिससे आमजन और यात्रियों को बिना सुविधा मिले भारी परेशानी का सामना करना भारी पड़ रहा है।
मुख्य बाजार का शौचालय बना दुर्गंध का केंद्र
पुराने बस स्टैंड स्थित मुख्य बाजार क्षेत्र में पिछले बोर्ड के कार्यकाल में तकरीबन 32 या 35 लाख रुपये की लागत से निर्मित सुलभ शौचालय बदहाली के आंसू बहाता जा रह है। टूटे दरवाजे नलकूप एवं नियमित साफ-सफाई के अभाव में यहाँ गर्मी शुरू होते ही दिन-रात दुर्गंध फैल रहा है। मुख्य बाजार के व्यापारियों के अनुसार शौचालय के आसपास ठेले लगने से स्थिति और चिंताजनक हो गई है। जिससे स्वास्थ्य संबंधी खतरे भी बढ़ रहे हैं।
नया बस स्टैंड: नवीनीकरण के बाद भी बदहाल
निवर्तमान बोर्ड के कार्यकाल में भी नए बस स्टैंड पर पालिका कार्यालय के सामने बने सुलभ कॉम्प्लेक्स और दो मूत्रालय भी अव्यवस्था का शिकार हैं। यहाँ रोजाना आने वाले यात्रियों को गंदगी और दुर्गंध का सामना करना पड़ता है। जबकी
एक मूत्रालय का करीब दो वर्ष पूर्व लगभग दस लाख रुपये की लागत से सेंसरयुक्त उपकरणों के साथ नवीनीकरण किया गया था। लेकिन कुछ ही समय में यह असामाजिक तत्वों द्वारा क्षतिग्रस्त कर दिया गया। वर्तमान में यह उपयोग योग्य नहीं रहा।
सफाई व्यवस्था पर उठते सवाल से स्वच्छता के नाम कलंक
पालिका क्षेत्र में सफाई व्यवस्था के लिए दो सफाई निरीक्षक, चार जमादार और करीब 100 सफाई कर्मी कार्यरत बताए जाते हैं। जिन पर सालाना लाखों रुपये खर्च हो रहे हैं। इसके बावजूद कस्बे में जगह- जगह कचरे के ढेर दिखाई देना व्यवस्था की प्रभावशीलता पर प्रश्नचिह्न लगाता है।
जनस्वास्थ्य पर मंडराता खतरा
सार्वजनिक शौचालयों की बदहाली, दुर्गंध और गंदगी न केवल असुविधा का कारण है। बल्कि संक्रामक रोगों के फैलने का खतरा भी बढ़ा रही है। यात्रियों, व्यापारियों और स्थानीय नागरिकों ने पालिका प्रशासन से नियमित सफाई और रखरखाव की मांग की है।
कार्रवाई की मांग
स्थानीय लोगों का कहना है कि केवल निर्माण कार्यों पर खर्च करने से स्वच्छता सुनिश्चित नहीं होगी। शौचालयों के रखरखाव, निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की आवश्यकता है। ताकि आमजन को मूलभूत सुविधाएँ मिल सकें।
यदि समय रहते सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए, तो स्वच्छता के नाम पर कलंक और अभियान के दावे कागज़ों तक सीमित रह जाएंगे और तखतगढ़ की जनता को बदहाली झेलनी पड़ेगी।



