• April 10, 2026

राष्ट्रव्यापी भारत बंद का ऐलान: 23 अप्रैल को राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग मोर्चा और मूलनिवासी संगठनों का संयुक्त आंदोलन

PALI SIROHI ONLINE

सिरोही-भारत मुक्ति मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष वामन मेश्राम और राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी विकास पटेल ने 23 अप्रैल 2026 को भारत बंद का आह्वान किया है।

राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग मोर्चा के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष एडवोकेट दशरथ सिंह आढ़ा ने आरोप लगाया कि आजादी के बाद से प्रमुख राजनीतिक दलों ने ओबीसी समाज के साथ लगातार धोखा किया है। उन्होंने कहा कि दोनों पार्टियां आपसी समझौते से पिछड़े वर्ग की जाति आधारित जनगणना नहीं करा रही हैं।

एडवोकेट आढ़ा ने आगे कहा कि यदि हिस्सेदारी नहीं मिलेगी, तो लोकतंत्र प्रतिनिधित्व विहीन हो जाएगा और कुछ अल्पसंख्यक जातियों के नियंत्रण में चला जाएगा। उन्होंने बताया कि इसी अन्याय के विरोध में 23 अप्रैल को पूरे देश में भारत बंद किया जा रहा है।

बहुजन क्रांति मोर्चा के जिला संयोजक एडवोकेट सुंदर लाल मोसलपुरिया ने उच्च शिक्षा संस्थानों में बढ़ती जातिगत प्रताड़ना का मुद्दा उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने कमजोर यूजीसी इक्विटी रेगुलेशन एक्ट लाकर सुप्रीम कोर्ट में प्रभावी पैरवी नहीं की, जिससे यह कानून अधर में लटक गया।मोसलपुरिया ने यूजीसी की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि उच्च शिक्षण संस्थानों में प्रताड़ना की घटनाएं 118 प्रतिशत तक बढ़ी हैं, जिसमें रोहित वेमुला और पायल तडवी जैसे हजारों छात्र-छात्राएं शिकार हुए हैं। भारत मुक्ति मोर्चा के जिलाध्यक्ष डॉ. आसुराम लूनिया ने 2011 से पहले नियुक्त सभी शिक्षकों पर टीईटी लागू करने के फैसले का कड़ा विरोध किया।

क्षत्रिय मूलनिवासी महासंघ के राष्ट्रीय सचिव राजेंद्र सिंह परमार ने सभी मुद्दों का समर्थन करते हुए कहा कि वर्तमान व्यवस्था में सरकार क्षत्रिय समाज के गौरवशाली इतिहास को तोड़-मरोड़कर पेश कर रही है और उनके महापुरुषों का चरित्र हनन किया जा रहा है।

विभिन्न संगठनों ने आम जनता, व्यापारियों, परिवहन कर्मियों और किसानों से अपील की है कि वे 23 अप्रैल को अनावश्यक आवागमन से बचें और शांतिपूर्ण तरीके से भारत बंद को सफल बनाने में सहयोग करें।

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