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सिरोही-जालोर-सिरोही सांसद लुंबाराम चौधरी ने लोकसभा में 3 प्राइवेट मेंबर बिल पेश किए हैं। इन विधेयकों में स्वदेशी गौ और गौ-संतति संरक्षण बोर्ड 2024, चारा भंडारण बोर्ड 2025 और दुग्ध एवं दुग्ध उत्पाद लाभकारी मूल्य-2025 शामिल हैं।
सांसद चौधरी ने विधेयक पेश करते हुए कहा कि गाय शताब्दियों से ग्रामीण भारतीय परिवारों की धर्म-संस्कृति और अर्थव्यवस्था का अभिन्न हिस्सा रही है।
उन्होंने चिंता व्यक्त की कि भारत में देसी गायों की संख्या तेजी से घट रही है, जिससे अगले 10 वर्षों में भारतीय गायों की आम मौजूदगी खत्म होने का खतरा पैदा हो गया है।
देसी गौदुग्ध के महत्व पर भी डाला प्रकाश
उन्होंने बताया कि पारंपरिक तौर पर भारत में गायों की विविध जातियां मौजूद हैं। सूखे दिनों में भी दूध देने वाली साहीवाल नस्ल की गायें हों या अन्य किस्में, ये सभी देश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ रही हैं।
चौधरी ने देसी गौदुग्ध के वैज्ञानिक महत्व पर भी प्रकाश डाला। वैज्ञानिकों ने इसे संपूर्ण आहार माना है, जिसमें मानव शरीर के लिए आवश्यक सभी पोषक तत्व होते हैं। उन्होंने बताया कि देसी गाय के दूध में विटामिन ए-2 होता है, जिसे कैंसरनाशक माना जाता है।
रोगों को ठीक करने में सहायक है गौमूत्र’
आयुर्वेद में गौमूत्र के ढेरों प्रयोग बताए गए हैं, इसे विषनाशक, रसायन और त्रिदोषनाशक माना गया है। वैज्ञानिकों ने गौमूत्र के रासायनिक विश्लेषण में 24 ऐसे तत्व पाए हैं जो शरीर के विभिन्न रोगों को ठीक करने की क्षमता रखते हैं। इसके अतिरिक्त, देसी गाय के गोबर से जैविक खाद का निर्माण होता है, जिससे जमीन की उर्वरा शक्ति बढ़ती है। इन सभी कारणों से देश की अर्थव्यवस्था में देसी गायों की भूमिका को नकारा नहीं जा सकता। सांसद चौधरी ने यह भी बताया कि 10.2 करोड़ टन वार्षिक दूध उत्पादन के साथ भारत दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश है।
