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सिरोही-सिरोही-जालोर बोर्डर के पास कैलाश नगर क्षेत्र के लोटीवाड़ा गांव में एमडी ड्रग्स की फैक्ट्री लगाने वाले मुख्य आरोपी रमेश विश्नोई को एएनटीएफ ने 21 माह बाद कोलकाता से पकड़ा लिया। रमेश मूलतः बाड़मेर के धोरीमन्ना का है। मामले में टीम ने 21 माह पहले 27 अप्रैल को 13 तस्करों को पकड़ा था। इस फैक्ट्री में बनने वाला ड्रग पंजाब हरियाणा व दिल्ली एनसीआर तक सप्लाई होती थी।
एटीएस महानिरीक्षक पुलिस विकास कुमार ने बताया कि सिरोही के इलाके में पकड़ी एमडी की फैक्ट्री का कर्ताधर्ता बाड़मेर के धोरीमन्ना निवासी रमेश कुमार उर्फ अनिल उर्फ रामलाल पुत्र सोहनलाल विश्नोई को कोलकाता में गंगासागर जाते समय एएनटीएफ ने गिरफ्तार किया। रमेश ने ही सिरोही के कैलाश नगर के लोटीवाड़ा गांव में एमडी की फैक्ट्री लगवाई थी। क्योंकि यह गांव सिरोही-जालोर बोर्डर पर स्थित है। इस गांव से मात्र 8 किमी दूर ही जालोर की सीमा है। पिछले 21 माह से टीम मुख्य आरोपी की तलाश कर रही थी। एटीएस महानिरीक्षक विकास कुमार ने बताया कि एएनटीएफ की टीम कोलकाता में हुलिया बदलकर मजदूर बनी और हावड़ा की एक स्टील की दुकान पर काम करने वाले युवकों से दोस्ती की। वहीं से पता चला कि रमेश आजकल धार्मिक हो गया है और गंगासागर जाने की तैयारी में है। टीम ने गंगासागर के ट्रेवल एजेंट को विश्वास में लिया। एजेंट की पत्नी रमेश के घर खाना बनाती थी। वहीं से पुलिस ने दबोच लिया। रमेश कुमार खुद को केमिस्ट्री का टीचर बताता था। पिछले कुछ सालों में 12 ज्योतिर्लिंगों और चारों धाम की यात्राएं कर चुका है।
ज्यादातर सफर फ्लाफ से करता था। गत जनवरी माह के प्रथम सप्ताह में रमेश कोलकाता से पूणे गया और द्वितीय सप्ताह में वापस कोलकाता आया था। यह तथ्य सामने आते ही एनटीएफ व एटीएस की विशेष टीम को कोलकाता में लगाया गया था। एटीएस महानिरीक्षक विकास कुमार ने
बताया कि रमेश के खिलाफ राजस्थान में 15-17, गुजरात में8, तेलंगाना में 3, महाराष्ट्र में 2 और कर्नाटक में 1 मुकदमा खुद ने स्वीकार किया है। पिछले 8 सालों से फरार रहकर नशे का काला कारोबार कर रहा था। एक किलो एमडी बनाने में जहां करीब एक लाख रुपए खर्च आता था। वहीं बाजार में वही जहर 30 लाख रुपए तक बेचता था।
आरोपी रमेश खुद का नाम कभी रमेश तो कभी अनिल, रामलाल भी नाम रखे, जिस राज्य में जाता, वैसा ही भेष बदल देता। एटीएस महानिरीक्षक विकास कुमार ने बताया कि मुख्य आरोपी रमेश विश्नोई महाराष्ट्र से एमडी बनाने का फार्मूला सीखकर आया था। इस फार्मूला में ब्रोमो, कास्टिक सोडा, हाइड्रोक्लोरिक एसिड, टार्लबन व एथिल अल्कोहल मिलकार केमिकल प्रक्रिया से एमडी बनाई थी। इस प्रक्रिया में 5 से 7 दिन लगते थे। महाराष्ट्र जेल में सरगना डॉ. बिरजू के संपर्क में आने के बाद रमेश ने एमडी व्यापार शुरू किया था। पहले महाराष्ट्र में खुदरा एमडी बनाकर राजस्थान आपूर्ति करता था।
बाद में उसने अपने 2 से 3 पार्टनर बनाकर अलग-अलग जिलों में अन्य सहयोगी बनाकर उनकी जमीन और मकान में कारखाना स्थापित करता था। महाराष्ट्र से डॉ. बिरजू के माध्यम से ही केमिकल एक्सपर्ट फैक्ट्री में पहुंचते थे। वहीं मुंबई में ही एक महिला के माध्यम से मुंबई-पुणे और गुजरात से केमिकल आते थे। बाड़मेर. 23 जुलाई 2025 को रमेश ने सेड़वा में लगाई थी MD की फैक्ट्री।

