PALI SIROHI ONLINE
सिरोही-जहाज मंदिर में प्रभु भक्ति के साथ हुआ ध्वजारोहण
सिरोही। श्री पावापुरी तीर्थ के निकट रेवदर-मंडार हाईवे पर स्थित जहाज मंदिर में शनिवार को भगवान मुनिसुव्रतस्वामी एवं नवग्रह जिनालय में विधि विधान के साथ ध्वजा फहराई गई।
मोन साधना में लीन प्रर्वतक गुरूदेव पाश्र्वयशचन्द्र, मुनिराज पुण्यरत्नचन्द्र एवं नयशेखरचन्द्र महाराज एवं साध्वी भगवंतो की निश्रा में ध्वजा का वरघोडा निकला जिसमें भक्तगण नाचते गाते एवं जय जय श्री मुनिसुव्रतस्वामी के जयकारे लगाते हुऐ चल रहे थे। वरघोडा जिनालय परिसर से गुजरता हुआ मुख्य जिनालय पहुंचा ओर वहां पर सतरभेदी पूजा पढाई गई ओर विधि विधान एवं मंत्रोचार के साथ ध्वजा की पूजा अर्चना तीर्थ संस्थापक परिवार के विजयराज चैधरी, मनोज, निर्मल, अशोक, भावेश, रिचा एवं दर्शन चैधरी परिवार की ओर से की गई।
पूजन के बाद ध्वजा लेकर मंदिर की तीन प्रदक्षिणा दी तब श्रावक-श्राविकाओं ने अक्षत से ध्वजा का वधामण किया। विजय मुर्हुत में ओम पुण्यांम-पुण्यांम, प्रियमताम-प्रियमताम के जाप के साथ मुख्य जिनालय बटुक भैरव शक्तिपीठ एवं युगप्रधान दादासाहेब पाश्र्वचन्द्रसूरीजी महाराजा के गुरूमंदिर पर ढोल ढमाको के साथ ध्वजा फहरकाई गई।
इस अवसर पर भगवान मुनिसुव्रतस्वामी की प्रतिमा पर रजत-स्वर्ण की मनमोहक आंगी रचना ओर तीर्थ परिसर मेें जगह-जगह रंगोली व रोशनी की गई।
ध्वजारोहण कार्यक्रम में कोलकाता, जयपुर, जोधपुर, नागौर, सिरोही एवं आबुगोड जैन समाज के भक्तगण बडी संख्या में उपस्थित हुऐ ओर प्रभु भक्ति एवं स्वामीवात्सल्य का लाभ लिया। इस अवसर पर तीर्थ संस्थापक परिवार के प्रमुख विजयराज चैधरी का भक्तगणो ने बहुमान कर उन्हें मंदिर निर्माण करवाने के लिए बधाई दी ओर कहा कि उन्होने जैन शासन की प्रभावना का उत्कृष्ठ कार्य किया हैं। ध्वजा के बाद पूज्य गुरूदेव ने हित शिक्षा देते हुऐ कहा कि हमें जैन शासन की जो अमूल्य धरोहर है उसे सुरक्षित एवं संरक्षित करने का कार्य करने के लिए अग्रिम पंक्ति में खडा रहने की जरूरत हैं। जैन धर्म अंहिसा परमो धर्म एवं जीओ ओर जीने दो की भावना के साथ समन्वय के साथ रहने की सीख देता हैं।

