पीर की जाल दरगाह का उर्स 20 मार्च सेः तैयारियां जोरों पर, देशभर से आएंगे जायरीन
PALI SIROHI ONLINE
सांचौर-सांचौर उपखंड मुख्यालय से करीब 7 किलोमीटर दूर स्थित अल मशहूर दरगाह हज़रत मखदूम पीर दादा अब्बनशाह रहमतुल्लाह अलेह की जाल पर इस साल का वार्षिक उर्स मेला 20 मार्च से 30 मार्च तक आयोजित किया जाएगा। उर्स को लेकर दरगाह परिसर में तैयारियां तेज कर दी गई हैं। इंतजामिया कमेटी की ओर से देश-विदेश से आने वाले जायरीनों के स्वागत और सुविधाओं के लिए विशेष प्रबंध किए जा रहे हैं, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
दरगाह इंतजामिया वक्फ कमेटी के खादिम एडवोकेट इब्राहिम शाह जुनेजा ने बताया कि उर्स की शुरुआत 20 मार्च को सुबह 9 बजे झंडा-नेजा की रस्म के साथ होगी। इसके बाद लगातार धार्मिक कार्यक्रमों का सिलसिला चलेगा।
उन्होंने बताया कि 23 मार्च की देर रात संदल की रस्म अदा की जाएगी, जो उर्स का प्रमुख आकर्षण मानी जाती है। वहीं 30 मार्च को उर्स मुबारक के साथ इस दस दिवसीय मेले का समापन किया जाएगा।
कौमी एकता की मिसाल है दरगाह
दरगाह हज़रत मखदूम पीर दादा अब्बनशाह रहमतुल्लाह अलेह पर हर साल देश के अलग-अलग राज्यों के साथ-साथ विदेशों से भी बड़ी संख्या में जायरीन जियारत के लिए पहुंचते हैं। श्रद्धालु यहां अपनी मन्नतें लेकर आते हैं और दुआ मांगते हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार यह दरगाह लंबे समय से कौमी एकता और भाईचारे का प्रतीक रही है। यहां सभी धर्मों के लोग समान श्रद्धा के साथ आते हैं और आध्यात्मिक वातावरण में शामिल होते हैं।
जायरीनों के लिए लंगर, पेयजल और चिकित्सा की व्यवस्था
उर्स मेले के दौरान आने वाले श्रद्धालुओं के लिए दरगाह इंतजामिया वक्फ कमेटी ने कई जरूरी व्यवस्थाएं की हैं। मेले के पूरे समय रोजाना दो बार लंगर का आयोजन किया जाएगा, जिसमें जायरीनों को भोजन कराया जाएगा।
इसके अलावा रोशनी, पेयजल और चिकित्सा जैसी सुविधाओं की भी व्यवस्था की जा रही है। सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पुलिस प्रशासन भी सतर्क रहेगा और मेले के प्रमुख स्थानों पर पुलिसकर्मी तैनात किए जाएंगे।
रोजाना उलमाओं के बयान और सूफियाना कव्वालियों की महफिल
उर्स के दौरान हर दिन ईशा की नमाज के बाद उलमाए किराम के बयानात होंगे, जिनमें इस्लामी शिक्षाओं और सामाजिक संदेशों पर रोशनी डाली जाएगी।
इसके साथ ही राजस्थान और गुजरात के मशहूर कव्वाल सूफियाना अंदाज में कव्वालियां पेश करेंगे। देर रात तक चलने वाली इन महफिलों में बड़ी संख्या में जायरीन शामिल होकर आध्यात्मिक माहौल का आनंद लेते हैं।
मेले में झूले, मौत का कुआं और बाजार भी रहेगा आकर्षण
उर्स मेले के दौरान श्रद्धालुओं के साथ आने वाले परिवारों और बच्चों के मनोरंजन के लिए भी विशेष इंतजाम किए जाते हैं। मेले में झूले, मौत का कुआं, मिठाइयों, खिलौनों और मनिहारी की कई दुकानें लगाई जाएंगी।
हर साल की तरह इस बार भी मेले में हजारों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना जताई जा रही है, जिससे पूरे इलाके में रौनक बढ़ने की उम्मीद है।

