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पाली-चातुर्मास समाप्त होने के बाद से विवाह के लगातार डेढ़ महीने तक शुभ मुहूर्त हैं। इस महीने में विवाह के लिए पूरे 16 मुहूर्त उपलब्ध रहेंगे। इनमें मांगलिक कार्य और विवाह समारोह बिना किसी रुकावट के किए जा सकते हैं। 16 नवंबर को सूर्य के तुला राशि से निकलकर वृश्चिक राशि में आने से शादी-विवाह का दौर आरंभ हो जाएगा। 15 दिसंबर के बाद शादी-विवाह सहित अन्य मांगलिक कार्यक्रमों पर विराम लग जाएगा। शादी-विवाह के लिए शुभ मुहूर्त का होना महत्वपूर्ण होता है। वैवाहिक बंधन को सबसे पवित्र रिश्ता माना है। इसलिए इसमें शुभ मुहूर्त का होना जरूरी है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शादी के शुभ योग के लिए बृहस्पति, शुक्र और सूर्य का शुभहोना जरूरी है। रवि गुरु का संयोग सिद्धिदायक और शुभफलदायी होते हैं।
15 दिसंबर से नहीं होगा वैवाहिक व अन्य शुभ कार्य : आगामी 15 दिसंबर गुरुवार को पूर्व दिशा में शुक्र ग्रह के अस्त होने तथा वृद्धत्व दोष के कारण 15 दिसंबर से विवाहित शुभ कार्य नहीं होंगे। फिर शुक्र अस्त हो जाएगा। शुक्र अस्त होने से एक माह 16 दिन के लिए वैवाहिक कार्यक्रम में ब्रेक
लग जाएगा। जैसे ही शुक्र उदय होगा। वैसे ही 2 फरवरी से फिर विवाह के मुहूर्त शुरू हो जाएंगे। जनवरी में खरमास की समाप्ति के बाद एवं शुक्र ग्रह के अस्त होने से शादी-विवाह नहीं होंगे। शादी के शुभ लग्न व मुहूर्त निर्णय के लिए वृष, मिथुन, कन्या, तुला, धनु व मीन लग्न में से किन्हीं एक का होना जरूरी है। वहीं नक्षत्रों में से अश्विनी, रेवती, रोहिणी, मृगशिरा, मूल, मघा, चित्रा, स्वाति, श्रवणा, अनुराधा, उत्तरा फाल्गुन, उत्तरा भद्र व उत्तरा आषाढ़ में किन्हीं एक का रहना जरूरी है।
16 नवंबर से गुरु और शुक्र प्रबल होंगे: ज्योतिर्विद. पंडित महेश श्रीमाली ने बताया कि नवंबर और दिसंबर में शादियों के मुहूर्त रहेंग। इनमें एक सावा 10 और 2 सावे 9 रेखा के होंगे। 16 नवंबर से जब गुरु और शुक्र प्रबल होंगे, उसके बाद विवाह के शुभ मुहूर्त शुरू हो जाएंगे। नवंबर में 12, 13, 22, 23, 24, 25, 26, 27, 29 व 30 नवंबर विवाह के लिए शुभ रहेगा। अगले महीने दिसंबर में विवाह के कम ही मुहूर्त हैं। दिसंबर में 4, 5, 6, 11 व 12 दिसंबर को ही शादी के मुहूर्त है। नवंबर में 26 तारीख को 10 रेखा का सावा है, जबकि 30 नवंबर और 11 दिसंबर को 9 रेखा का सावा रहेगा।

