पाली जिला मजिस्ट्रेट अंशदीप ने कोरोना संक्रमण से बचाने के लिए सभी धार्मिक स्थलों को 30 अप्रैल तक बंद रखने का निर्णय किया

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पाली, 12 अप्रैल। जिला मजिस्ट्रेट अंशदीप ने आगामी दिनों में आयोजित होने वाले मेलों तथा पर्वों के दौरान जिले के धार्मिक स्थानों पर उमडऩे वाली भीड़ को कोरोना महामारी के संक्रमण से बचाने के लिए सभी धार्मिक स्थलों को 30 अप्रैल तक बंद रखने का निर्णय किया है।

जिला मजिस्ट्रेट ने यह निर्णय सोमवार को संक्रमण के फैलाव की रोकथाम के संबंध में जिले के विधायकों, समस्त धर्म गुरुओं एवं शहर के मौजीज व्यक्तियों के साथ बैठक करने के बाद किया।
जिला मजिस्ट्रेट ने कहा कि कोविड 19 के संक्रमण की रोकथाम के लिए राज्य सरकार ने विशेष गाइडलाइन जारी कर रखी है। पिछले 5 महीनों में विभिन्न समाजों के सहयोग से कोरोना महामारी के संक्रमण के मामलों में कमी दर्ज की जा रही थी, लेकिन अब कोरोना वायरस की दूसरी लहर बहुत तेजी के साथ बढ़ रही है और इसे रोकने के लिए तथा सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए महामारी के प्रसार की श्रंखला को प्रभावी ढंग से तोडऩे की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि कोविड 19 के विरुद्ध अब जन आंदोलन प्रारंभ करना समय की मांग है। प्रत्येक नागरिक को सावधानी बरतते हुए निगरानी, नियंत्रण और दिशा-निर्देशों के सख्त पालन पर ध्यान केंद्रित करते हुए मानक संचालन प्रक्रिया की सख्ती से पालना करवाना जरूरी है। जिला मजिस्ट्रेट ने कहा कि आगामी दिनों में विभिन्न समाजों के मेलों तथा पर्वों का आयोजन होगा। ऐसे में विभिन्न धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटेगी। इन दिनों कोरोना की दूसरी लहर के तेजी से फैलने के कारण श्रद्धालुओं के कोरोना वायरस की चपेट में आने की आशंका बनी रहेगी। इस कारण 30 अप्रैल तक जिले में स्थित सभी धार्मिक स्थलों को बंद रखने का निर्णय किया गया है।
उन्होंने कहा कि पाली जिले में स्थित सभी धार्मिक स्थल जैसे मंदिर, मस्जिद, चर्च, गुरुद्वारा, गिरजाघर, सत्संग स्थल 30 अप्रैल तक की अवधि के लिए श्रद्धालुओं के लिए बंद रखे जाएंगे। सभी धार्मिक स्थलों में नियमित पूजा-अर्चना, नमाज, प्रार्थना, अखंड पाठ इत्यादि का आयोजन संबंधित धार्मिक स्थल के पुजारी, मौलाना या पादरी करेंगे। इन धार्मिक स्थलों पर 5 या 5 से अधिक व्यक्ति एकत्रित नहीं हो सकेंगे। धार्मिक स्थलों पर लगे लाउड स्पीकर सिस्टम के माध्यम से कोविड 19 से बचाव एवं टीकाकरण के लिए जन जागरण की अपील प्रसारित की जाए। जिला मजिस्ट्रेट ने कहा कि यह आदेश जनहित में जारी किया गया है तथा अत्यावश्यक प्रकृति का है। इस आदेश का उल्लंघन अपराध की श्रेणी में माना जाएगा। उल्लंघन करने वाले व्यक्ति अथवा व्यक्तियों पर भारतीय दंड संहिता की धारा 181 एवं आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 तथा राजस्थान एपिडेमिक डिजीज एक्ट 2020 में निहित प्रावधानों के अंतर्गत अभियोजित किया जा सकेगा।