पाली नगर परिषद तथा सुमेरपुर व सोजत सिटी नगर पालिका को आॅक्सीजन प्लांट लगाने की स्वीकृति मिली

PALI SIROHI ONLINE

पाली, 06 मई। राज्य सरकार ने प्रदेश में कोविड़ 19 के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए राजकीय चिकित्सालयों में आॅक्सीजन प्लांट लगाने की स्वीकृति जारी की है। इसके तहत पाली जिले में पाली नगर परिषद को 150 सिलेण्डर प्रतिदिन तथा सुमेरपुर व सोजत सिटी नगर पालिका को 75-75 सिलेण्डर प्रतिदिन क्षमता के आॅक्सीजन प्लांट लगाने की मंजूरी दी गई है।जिला कलक्टर अंश दीप ने बताया कि कोविड़ 19 के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए राजकीय चिकित्सालयों में आॅक्सीजन प्लांट लगाने की मुख्यमंत्री श्री अशोक गहलोत स्वीकृति दे चुके थे। इसके बाद नगरीय विकास, आवासन एवं स्वायत्त शासन मंत्री श्री शांति धारीवाल की अध्यक्षता में बुधवार रात तक हुई उच्च स्तरीय बैठक में राज्य के 59 शहरी निकायों में स्थित राजकीय चिकित्सालयों में 50 से दो हजार सिलेण्डर प्रतिदिन क्षमता के आॅक्सीजन प्लांट लगाने की मंजूरी जारी की गई।


उन्होंने बताया कि इसके तहत पाली नगर परिषद को 150 सिलेण्डर प्रतिदिन तथा सुमेरपुर व सोजत सिटी नगर पालिका को 75-75 सिलेण्डर प्रतिदिन क्षमता के आॅक्सीजन प्लांट लगाने की स्वीकृति दी गई है। उन्होंने बताया कि आॅक्सीजन प्लांट लगाने के लिए सम्पूर्ण प्रक्रिया निष्पादित करने को नौ अधिकारियों की उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया है। यह समिति राजकीय चिकित्सालयों में अलग अलग क्षमता के आॅक्सीजन प्लांट लगाने के निर्धारित तकनीकी मापदण्ड एवं तकनीक का निर्धारण करेंगी। आॅक्सीजन प्लांट के एक वर्ष के संचालन व रखरखाव, दो साल की वारण्टी, डीएलपी के साथ पीसीए टेक्नोलाॅजी सहित प्लांट निर्माताओं के पूर्व अनुभव वित्तीय क्षमताओं, नियमों एवं शर्तों को शामिल करते हुए अभिरूची की अभिव्यक्ति (आरएफपी) की जाएगी।


उन्होंने बताया कि स्वीकृत किए गए सभी आॅक्सीजन प्लांट आगामी दो महिनों में अस्तित्व में आ जाएंगे। उन्होंने बताया कि प्रदेश के 59 शहरी निकायों में स्थित राजकीय चिकित्सालयों में स्थापित किए जाने वाले इन आॅक्सीजन प्लांटों से प्रतिदिन 120 मैट्रिक टन लीक्विड मेडिकल आॅक्सीजन उत्पादित हो सकेगा। इन प्लांटों से प्रतिदिन 12 हजार सिलेण्डर भरे जा सकेंगे जो 6 हजार बैड के लिए पर्याप्त होंगे। उत्पादित आॅक्सीजन पाईपलाईन के जरीए 7 हजार 500 बैड को उपलब्ध करवाई जा सकेंगी। इन प्लांटों की स्थापना पर 120 से 125 करोड़ रुपये खर्च होंगे जिसे नगरीय विकास विभाग एवं स्वायत्त शासन विभाग की नगरीय इकाईयां वहन करेंगी।