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डी के देवासी
बाली उपखण्ड के कोठार गांव में काम्बेश्वर महादेव 36 कोम की गैर नृत्य का हुआ आयोजन
कोठार गांव मे गैर नृत्य का इतिहास वर्षों से चलता आ रहा है कोठार गांव मै होली चौक के प्रागण मै गोल घेरे में गैर नृत्य की संरचना सालों से चली आ रही है गैर नृत्य करने वालें ‘गैरिया’ होली से प्रारम्भ होता है तथा 7 दिन तक गैर नृत्य चलता है
यह बाली क्षेत्र कोठार गांव प्रसिद्ध रबारी लोक नृत्य कला जो पुरुषों द्वारा सामूहिक रूप से गोल घेरा बनाकर ढोल थाली से आदि वाद्ययंत्रों के साथ हाथों में डंडा लकड़ी लेकर किया
इस नृत्य को देखने लोग गांव से सैकड़ो आते है मारवाड़ के गैरिये नृत्यकार सफेद अंगरखी, धोती व सिर पर लाल पगड़ी धारण कर आते हैं लाइन से गोल घेरा लगाकर पुरुष एक साथ मिलकर वृत्ताकार रूप में नृत्य करते- इसे बोलते की मारवाड़ी गैर नृत्य की मूल रचना एक ही प्रकार है मण्डल में लगातार हाथो मे लकड़ी से ताल से ताल मिलाकर चलते है गैरिया अन्य रूप रबारी संस्कृति को प्रदर्शित करता है कोठार की प्रसिद्ध गैर नृत्य है।


