कोरोना पाॅजिटिव मरीजों के वैक्सीनेशन को लेकर नये दिशा निर्देश जारी

PALI SIROHI ONLINE

पाली, 21 मई। चिकित्सा स्वास्थ्य के परिवार कल्याण विभाग तथा राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन में कोरोना पाॅजिटिव मरीजों के वैक्सीनेशन को लेकर नये दिशा निर्देश जारी किए है। चिकित्सा विभाग के शासन सचिव सिद्धार्थ महाजन में इस संबंध में सीएमएचओ एवं जिला प्रजनन व शिशु अधिकारियों को गाइडलाइन भेजी है। इसमें कहा गया है कि कोरोना पाॅजिटिव किसी व्यक्ति को संक्रमण मुक्त होने तथा अस्पताल से डिस्चार्ज होने के पश्चात तीन माह की अवधि तक कोविड़ 19 वैक्सीन नहीं लगवाई जानी है।


जिला कलक्टर अंश दीप ने बताया कि नेशनल एक्सपर्ट गु्रप आॅफ वैक्सीन एडमिनिश्ट्रेशन फाॅर कोविड़ 19 के द्वारा टीकाकरण लागू करने की रणनीति के संदर्भ में मार्गदर्शन दिया जा रहा है। महामारी के समय में उत्पन्न हुई परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए वैज्ञानिक तथ्यों व वैश्विक अनुभवों के आधार पर कोविड 19 टीकाकरण के संदर्भ में कुछ सुझाव दिए गए है जिन्हें भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने स्वीकार किया है।
उन्होंने बताया कि नये दिशा निर्देशों के अनुसार यदि किसी व्यक्ति को लैब टेस्ट द्वारा कोविड़ 19 बीमारी से ग्रसित पाया जाता है तो उसे रिकवर होने से तीन अवधि तक कोविड 19 वैक्सीन नहीं लगाई जाएगी।

कोविड़ 19 मरीज जिसे एंटी सार्स-टू मोनो क्लोनल एंटीबाॅडीज या कोनवेलसेंट प्लाज्मा दिया गया है तो उसे चिकित्सालय से डिस्चार्ज होने के बाद तीन माह की अवधि तक कोविड़ 19 वैक्सीन नहीं लगाई जाएगी। उन्होंने बताया कि यदि किसी व्यक्ति को कोविड़ 19 वैक्सीन की प्रथम डोज लगाई गई है तथा निर्धारित समय पर दूसरी डोज प्राप्त करने से पूर्व उसे कोविड़ 19 संक्रमण होता है तो रिकवर होने के तीन माह की अवधि तक उसे कोविड 19 वैक्सीन नहीं लगाई जाएगी। यदि किसी व्यक्ति को अन्य बीमारियों के कारण चिकित्सालय अथवा आईसीयू में भर्ती किया गया हो तो उसे चार से आठ सप्ताह तक कोविड 19 वैक्सीन के लिए रूकना चाहिए।


उन्होंने बताया कि दिशा निर्देशों के अनुसार कोई भी व्यक्ति कोविड 19 वैक्सीन लगाने के 14 दिन बाद रक्तदान कर सकता है। इसी तरह कोविड़ 19 बीमारी से ग्रसित व्यक्ति आरटीपीसीआर टेस्ट नेगेटिव होने के 14 दिन बाद रक्तदान किया जा सकेगा। समस्त धात्री महिलाओं को कोविड़ 19 वैक्सीन लगाई जा सकती है। कोविड़ 19 वैक्सीन लगवाने से पूर्व लाभार्थी की रेपिडएंटीजन टेस्ट से स्क्रीनिंग करवाने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी एवं जिला प्रजनन व शिशु स्वास्थ्य अधिकारी से चिकित्सा विभाग के सभी अधिकारियों व कर्मचारियों तथा टीका कर्मियों को इन दिशा निर्देशों की पालना के लिए निर्देशित करना सुनिश्चित करने को कहा है।