कैदी-गुनाहों का रास्ता छोड प्रशिक्षण प्राप्त कर समाज की मुख्यधारा में शामिल हो सकेंगे

PALI SIROHI ONLINE

पाली। गुनाहों का रास्ता छोड प्रशिक्षण प्राप्त कर समाज की मुख्यधारा में शामिल हो सकेंगे। इसके लिए कारागृहों में स्किल डवलपमेंट कार्यक्रम आयोजित कर कैदियों को उनके रूची अनुसार कौशल प्रशिक्षण देकर उनको समाज की मुख्य धारा में लाया जा सकें।

राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक के अध्यक्ष डॉ. जीआर चिन्ताला ने बुधवार को पाली नाबार्ड व जिला प्रशासन और आइडियल संस्थान के समन्वय में किए जा रहे employability through skill initiative project के माध्यम से पाली जेल के 30 कैदियों के लिए एक विशेष परियोजना (सहायक इलेक्ट्रीशियन- घरेलू बिजली उपकरणों का रखरखाव व मरम्मत में 90 दिवसीय कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम) कार्यक्रम का निरीक्षण कर रहे थे। माननीय अध्यक्ष नाबार्ड द्वारा जिला कलक्टर के साथ जिला कारागृह में जिला प्रशासन, नाबार्ड, आईडियल संस्थान, द्वारा जिला कारागार में कैदियों हेतु संचालित प्रशिक्षण कार्यक्रम का निरीक्षण किया गया। माननीय अध्यक्ष नाबार्ड डॉ जीआर चिन्ताला ने कैदियों से बातचीत करते हुए उन्हें गुनाहों का रास्ता छोड़ते हुए एक सम्मान की ज़िन्दगी जीने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने बताया कि जिला प्रशासन एवं नाबार्ड के सहयोग से संचालित यह कार्यक्रम अपनी तरह की अनुठी पहल है। जिससे सजा पा रहे कैदियों को जीवन की नई राह इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के माध्यम से मिल पाएगी। ज़िले में ऐसा कार्यक्रम पहली बार हो रहा है जिससे न सिर्फ नए रोज़गार का अवसर मिलेगा, बल्कि एक जुर्म मुक्त जिले की दिशा में भी महत्वपूर्ण पहल साबित होगी। सजा पा रहे कैदी जैल से छुटने के उपरान्त अपराध नहीं करेगे साथ ही उन्हें बेरोजगारी का दंश भी नहीं झेलना पड़ेगा। उन्होने बताया कि इस प्रकार प्रशिक्षण कार्यक्रमों में कैदियों के स्क्रिलफुल होने से उनके जीवन की राह आसान होगी। इलेक्ट्रीशीयन, नल फिटीग, मोबाईल रिपेयर, पंखों को ठीक करना इत्यादि हुनर प्राप्त कर जीवन की एक नई शुरूआत कर सकेंगे। माननीय अध्यक्ष नाबार्ड डॉ.जीआर चिन्ताला द्वारा प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे कार्तिक, रमेश,महेन्द्र, किशन इत्यादि द्वारा पूरी कुशलता से प्रशिक्षण प्राप्त करने एवं अच्छा प्रदर्शन करने पर स्मृति चिन्ह देकर उत्साह बढ़ाया गया।

जिला कलेक्टर अंश दीप ने जानकारी देते हुए बताया कि कौशल द्वारा रोजगार देने हेतु आयोजित हो रहा यह प्रशिक्षण कार्यक्रम को पूर्ण करने उपरान्त प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे कैदियों को प्रमाण पत्र दिए जाऐगे साथ ही उन्हें टूल-कीट भी मुहैया करवाए जाएगे जिससे सजा पूरी कर बाहर आने पर रोजगार मिल सकेगा। माननीय अध्यक्ष नाबार्ड डॉ.जीआर चिन्ताला ने इस पहल को एक नवीन शुरूआत एवं अनुकरणीय उदाहरण बताया साथ ही पाली की तर्ज पर प्रदेश भर में इस तरह के कौशल प्रशिक्षण आयोजित किए जाने की बात कहीं।

चीफ जनरल मैनेजर नाबार्ड जयदीप श्रीवास्तव ने बताया कि कार्यक्रम का उद्देश्य कैदियों के बीच उद्यम शुरू करने, घरेलू उपकरणों और बिजली की मरम्मत के क्षेत्र में प्रवेश करने के लिए पर्याप्त कौशल विकसित करना है। इस कार्यक्रम के माध्यम से कैदियों को रिहा होने के बाद एक सम्मानजनक जीवन जीने में मदद करने की भी परिकल्पना की गई है। प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान “सचेत- इलेक्ट्रिसिटी सेफ्टी हैंडबुक का भी वितरण किया गया है। जो कैदियों को सुरक्षित रहते हुए हुनरमंद बनने में सहायक साबित होगी।

कार्यक्रम में डीडीएम नाबार्ड विनोद दाधीच ने बताया कि जेल में निरुद्ध विचाराधीन बन्दियों को रोजगारमुखी प्रशिक्षण देने का दायित्व अच्छी पहल है। कार्यकम में आइडियल संस्थान के सीईओ अरूण कटियार, ट्रेनर नरेंद्र कुमार एवं सहायक ट्रेनर महेंद्र पंवार का भी सहयोग रहा।

इस दौरान जेल में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे कैदियों द्वारा निर्मित पंखों एवं लाईट सिस्टम हेतु ’’लोगो-जोश पंखा/उजाला लाईट’’(जिला कारागार उत्पाद,पाली) का भी अनावरण किया गया। जेलर इकबाल भाटी समेत जिला कारागार से भंवरसिंह, रणजीतसिंह मौजूद रहे।

कृषि विज्ञान केन्द्र का निरीक्षण-
जेल में प्रशिक्षण कार्यक्रम के अवलोकन उपरान्त अध्यक्ष डॉ.जीआर चिन्ताला एवं जिला कलक्टर अंशदीप द्वारा कृषि विज्ञान केन्द्र,काजरी पहुंचकर केवीसी में संचालित हो रहे नाबार्ड के कार्यक्रमों का भी जायजा लिया गया। जहां नाबार्ड की सहायता से निर्मित कम लागत पोलि हाउस का उद्घाटन अध्यक्ष द्वारा किया गया।

कृषि विज्ञान केन्द्र परिसर में डॉ.जीआर चिन्ताला एवं जिला कलक्टर का साफा पहनाकर स्वागत किया गया साथ ही परिसर में वृक्षारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया गया। डा. धीरज सिंह, केवीसी काजरी द्वारा पाली केन्द्र पर विभिन्न गतिविधियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। इस अवसर पर डॉ.चिन्ताला ने केवीसी पाली की पहचान खारचिया गेहूं, मेहन्दी, कालातिल तथा स्थानीय उत्पाद प्रदर्शनी को देखा तथा बताया कि नाबार्ड कृषि विज्ञान केन्द्र की हर संभव मदद करेगा एवं किसानों को स्वरोजगार हेतु प्रशिक्षण भी देगा।

पाली जिला कलक्टर अंशदीप द्वारा नेपियर घास, गिनी घास के उत्पादन एवं बूंद-बूंद सिंचाई प्रणाली-जल संरक्षण की दिशा में किए जा रहे कार्यो के बारे में विस्तार से जानकारी दी।

इस अवसर पर डॉ. सुशीला चिन्ताला ने छात्र तथा महिलाओं को स्वरोजगार के लिए आगे आने की सलाह दी एवं विभिन्न कृषि कॉलेजों से आए हुए छात्र-छात्राओं से बात कर उनका उत्साह वर्धन किया।

इस दौरान चीफ जनरल मैनेजर नाबार्ड जयदीप श्रीवास्तव, जनरल मैनेजर NABKISAN सुशीला चिन्ताला, उपखण्ड अधिकारी पाली देशलदान समेत अधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद रहे।