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जालोर-जालोर एएनटीएफ चौकी ने गावड़ी गांव में एक ही दिन में एमडी (मेथामफेटामिन) बनाने की दो अवैध फैक्ट्रियों का भंडाफोड़ किया। पहली कार्रवाई में आधुनिक सेटअप, केमिकल और उपकरण बरामद कर दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।
पहली रेड की सूचना मिलते ही दूसरी फैक्ट्री संचालक ने अपना पूरा सेटअप हटाकर खेत में फसल के बीच छिपा दिया और फरार हो गया। टीम ने पहली कार्रवाई पूरी करने के बाद दूसरे ठिकाने पर दबिश दी। वहां कुछ नहीं मिलने पर आसपास तलाश की गई तो खेत में छिपाए गए केमिकल और उपकरण बरामद हुए। मौके से करीब 20 किलो एमडी बनाने योग्य केमिकल और फैक्ट्री का सामान जब्त किया गया।
इस मामले में गावड़ी निवासी अचलाराम पुत्र आसूराम देवासी फरार है, जिसकी तलाश जारी है। उल्लेखनीय है कि इस तरह की कार्रवाई पहले पड़ोसी जिले बाड़मेर के सेड़वा क्षेत्र में भी हो चुकी है।
कबाड़ी से मिला सुराग, बदली लोकेशन से खुला राज
जांच में सामने आया कि हाल ही में पकड़ी गई एक फैक्ट्री अपनी लोकेशन बदलने की तैयारी में थी। एएनटीएफ को बागोड़ा क्षेत्र में फैक्ट्री होने की सूचना थी, लेकिन 15 दिन की तलाश के बावजूद सटीक स्थान नहीं मिल पाया।
कबाड़ियों से पूछताछ के दौरान पता चला कि एक व्यक्ति खाली ड्रम मुफ्त में दे रहा है। इसी सुराग के आधार पर टीम फैक्ट्री तक पहुंची। कार्रवाई से बचने के लिए संचालक ओमप्रकाश ने पुरानी जगह खाली कर सहयोगी दीपाराम के कृषि कुएं पर नया सेटअप तैयार किया था, लेकिन उत्पादन शुरू होने से पहले ही टीम ने उसे पकड़ लिया।
डोडा तस्करी छोड़ एमडी निर्माण की ओर रुझान
पिछले छह माह में एएनटीएफ ने जालोर, बाड़मेर, जोधपुर और सिरोही जिलों में 12 अवैध एमडी फैक्ट्रियां पकड़ी हैं। जांच में सामने आया कि अधिकांश आरोपी पहले डोडा चूरा तस्करी से जुड़े थे।
डोडा तस्करी में अधिक जोखिम और सीमित मुनाफा होने के कारण अब तस्कर एमडी निर्माण की ओर रुख कर रहे हैं। एमडी फैक्ट्री कम खर्च में स्थापित हो जाती है और तैयार माल छोटे पैकेटों में होने से परिवहन आसान रहता है। केमिकल भी आसानी से उपलब्ध हो जाते हैं। बताया जा रहा है कि इस धंधे में 5 से 10 गुना तक मुनाफा होता है और मारवाड़ सहित गुजरात व अन्य राज्यों तक इसकी सप्लाई की जाती है।
फिलहाल एएनटीएफ फरार आरोपियों की तलाश में जुटी है और नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की जांच की जा रही है।

