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जयपुर। भाजपा के प्रदेश प्रभारी राधा मोहन दास अग्रवाल ने बिहार चुनाव परिणाम लेकर तीखे तेवर दिखाते हुए कांग्रेस और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने कहा कि बिहार में कांग्रेस के छह विधायक बचे हैं और उनके भी जनता दल (यू) में शामिल होने की चर्चाएं हैं।
ऐसे में गहलोत को राजस्थान छोड़कर बिहार जाकर अपने विधायकों को संभालना चाहिए, जैसे वे पहले अपने कार्यकाल में विधायकों को होटल में बांधकर रखते थे, जब सचिन पायलट उनके साथ खेला कर रहे थे। अग्रवाल ने कहा कि उन्हें लगता है कि अब अशोक गहलोत राजनीतिक रूप से पीछे छूट चुके है
उन्होंने कहा कि कांग्रेस कहती है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जुमलेबाजी करते हैं, जबकि अगर भाजपा जुमलेबाजी में व्यस्त होती तो वह बिहार, महाराष्ट्र, हरियाणा और दिल्ली जैसे राज्यों में जोरदार जीत दर्ज नहीं कर पाती। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस को पहले यह समझना चाहिए कि वह स्वयं चुनाव क्यों नहीं जीत पा रही है।
गहलोत के बयान पर पलटवार
गहलोत के इस बयान पर भी अग्रवाल ने पलटवार किया, जिसमें पूर्व सीएम ने आरोप लगाया था कि बिहार में भाजपा ने चुनाव आयोग को ‘हाईजैक’ कर लिया था और महिलाओं के खातों में राशि डालकर वोट प्रभावित किए गए। इस पर अग्रवाल ने कहा कि चुनाव आयोग नीतिगत स्तर पर दिल्ली से दिशा-निर्देश जारी करता है, लेकिन इन्हें जमीन पर लागू करना पूरी तरह प्रदेश प्रशासन की जिम्मेदारी होती है। बीएलओ से लेकर एसडीएम, डीएम और मुख्य निर्वाचन अधिकारी तक, सब राज्य सरकार के नियंत्रण में होते हैं।
हताशा में है कांग्रेस
ऐसे में यह कहना कि केंद्रीय चुनाव आयोग किसी राज्य में चुनाव को नियंत्रित कर सकता है, पूरी तरह अव्यावहारिक है। अग्रवाल ने कहा कि एसआईआर भी चुनाव आयोग का नीतिगत निर्णय है, लेकिन इसकी क्रियान्विति राज्यों की प्रशासनिक मशीनरी करती है। ऐसे में बार-बार चुनाव आयोग पर आरोप लगाना कांग्रेस की हताशा का परिणाम है।
उन्होंने कहा, जिसके पास दांत ही नहीं, वह चबाएगा क्या। चुनाव आयोग के पास अपनी कोई सेना नहीं होती। राज्य का पूरा अमला मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव के अधीन काम करता है, इसलिए चुनाव आयोग पर दखल के आरोप बेमानी हैं। कांग्रेस में टूट की आशंका पर बोलते हुए अग्रवाल ने कहा कि अशोक गहलोत कहते हैं कि प्रधानमंत्री मोदी कांग्रेस तोड़ने का सपना देख रहे हैं, जबकि स्थिति इसके उलट है। कांग्रेस की हालत ऐसी है कि बिना टूटे वह इस स्तर तक पहुंच ही नहीं सकती थी। बिहार में कांग्रेस के जो छह विधायक किसी तरह जीतकर आए हैं, उनके भी पार्टी छोड़ने की चर्चा है।

