पाली में 1976 के बाद दूसरी बार नहीं होगा रावण दहन, 200 से ज्यादा के इकठ्ठा होने पर भी पाबंदी

PALI SIROHI ONLINE

पाली-कोरोना की तीसरी लहर की आशंका के बीच इस बार भी पाली में रावण दहन होगा। क्योंकि प्रदेश सरकार ने सावर्जनिक आयोजन में 200 से ज्यादा लोगों के एकत्रित होने पर पाबंदी लगा रखी हैं। ऐसे में इस बार भी पाली में रावण दहन खटाई में हैं।

शहर के रामलीला मैदान में हर वर्ष नगर परिषद की ओर से दशहरे का प्रोग्राम आयोजित किया जाता हैं। जिसमें रावण व उसके भाईयों के पुतले, लंका नगरी बनाई जाती हैं। राम-लक्ष्मण व उसकी सेना के गेटअप में कलाकार रावण वध का नाटक करते हैं। रामलीला कमेटी के तत्वावधान में रामलीला का मंचन होता हैं। जिसकी शुरुआत वर्ष 1976 में हुई थी। उस दौरान तत्कालीन नगर पालिका के पदाधिकारियों की ओर से रावण दहन की परम्परा शुरू की गई थी। उसके बाद से पाली में निरन्तर रामलीला का मंचन एवं रावण दहन हो रहा हैं लेकिन कोरोना के चलते वर्ष 2020 में रावण दहन नहीं हो सका तथा इस वर्ष भी रावण नहीं करने का नगर परिषद ने निर्णय लिया हैं।

रामलीला का मंचन इस तरह से किया जाता था कि दशहरे के दिन रावण वध का मंचन किया जा सके। जिसका मंचन रावण, कुम्भकरण व मेघनाद के पुतलों के समक्ष किया जाता था। वहां राम-रावण की सेना का युद्ध भी होता था। दशहरे के दिन पाली शहर के पानी दरवाजा स्थित मंदिर से राम की सेना जुलूस के रूप में रामलीला मैदान आती हैं।

पाली में आयोजित रामलीला शहरवासियों के आकर्षका का केन्द्र रहती है। इसे देखने के लिए बड़ी संख्या में शहरवासी दशहरे के दिन शाम को रामलीला मैदान एकत्रित होते हैं। रावण दहन के दिन तो रामलीला मैदान में पैर रखने की जगह नहीं रहती है। पुलिस को वाहनों का प्रवेश भी सब्जी मण्डी क्षेत्र और प्रधान डाकघर के पास से बंद करना पड़ता था। वहां से लोग पैदल ही रामलीला मैदान तक जाते थे।