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चेन्नई में ज्वालामालिनी भक्ति महोत्सव हर्षोल्लास के साथ संपन्न, भक्तिरस में सराबोर हुआ वातावरण
बेंगलुरु/चेन्नई(दलपतसिंह भायल ) शहर के कलइमगल क्षेत्र स्थित संतोष बाई–आनंदराज गुन्देचा के निवास स्थान “त्रैलोक्य लक्ष्मी” में ज्वालामालिनी माता की आराधना का भव्य आयोजन किया गया। ज्वालामालिनी के गहन साधक पूज्य गुरु सत्यज्वाला की पावन निश्रा में आयोजित मंगल पाठ, जाप एवं ज्योत महोत्सव श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ संपन्न हुआ। इस धार्मिक आयोजन में बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाओं और भक्तों ने भाग लेकर ज्वाला मैया के प्रति अपनी आस्था प्रकट की।
कार्यक्रम का शुभारंभ ज्वालामैया की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। इसके पश्चात मंगलाचरण और भक्ति गीतों के साथ वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया। रवि पुष्य नक्षत्र जैसे अत्यंत शुभ और पवित्र योग में आयोजित इस कार्यक्रम में पूज्य गुरु सत्यज्वाला ने अपने प्रेरणादायी प्रवचन में ज्वालामालिनी माता की महिमा का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने अनेक धार्मिक प्रसंगों और दृष्टांतों के माध्यम से बताया कि सच्ची श्रद्धा, भक्ति और साधना से जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आते हैं तथा माता ज्वालामालिनी अपने भक्तों की हर मनोकामना पूर्ण करती हैं।
गुरुदेव ने कहा कि ज्वालामालिनी माता केवल आस्था का प्रतीक ही नहीं, बल्कि साधना, संयम और शक्ति का भी प्रतीक हैं। उनके प्रति अटूट विश्वास रखने वाले भक्तों के जीवन में आध्यात्मिक उन्नति के साथ-साथ सुख, शांति और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है।
कार्यक्रम के दौरान शांत और भक्तिपूर्ण वातावरण में उपस्थित सभी श्रद्धालुओं ने ज्वाला मैया के 108 जाप किए। गुरुदेव के मंत्रोच्चार के साथ कुमकुम अर्चना की गई, जिससे पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया। भक्तों ने पूरी श्रद्धा के साथ माता की आराधना कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
इस अवसर पर भक्ति संगीत की विशेष प्रस्तुति भी हुई। उषा परमार और जिया परमार ने गुरुदेव को वंदन करते हुए मधुर स्वर में कई भक्तिगीत प्रस्तुत किए। उन्होंने “चन्द्रप्रभु अधिष्ठायिका दुःख नाशक सुखकार, लाखों स्वर्गों से भला ज्वाला तेरा दरबार…” तथा “गुरूवर तेरा सर पर हाथ रहे…” जैसे भावपूर्ण भजनों से उपस्थित भक्तों को भक्ति रस में डुबो दिया। इन भजनों ने कार्यक्रम के माहौल को और भी आध्यात्मिक बना दिया और देर रात तक भक्तजन भक्ति में लीन रहे।
ज्वाला मैया की भक्ति के दौरान पूज्य गुरुदेव की प्रेरणा से “श्री चन्द्रज्वाला शक्तिपीठ तीर्थ” के निर्माण के लिए भूमि क्रय योजना की भी जानकारी दी गई, जिसमें अनेक भक्तों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए लाभ लिया। भक्तों ने इसे एक पुण्य अवसर मानते हुए तीर्थ निर्माण में अपना योगदान देने की भावना व्यक्त की।
कार्यक्रम में शहर के विभिन्न क्षेत्रों से आए अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे। इनमें स्वरूपचंद मुथा, सुन्दरलाल दुगड़, डॉ. प्रकाशचंद खिवेसरा, मुन्नालाल चौपड़ा, पंकज समदड़िया, प्रकाश झामड़, राजू मुथा, करण गुन्देचा, राहुल लुणिया, अर्जुन गुन्देचा, रसीला दुगड़, पूनम समदड़िया, सविता लुणिया, संगीता गुन्देचा, इन्द्राबाई, पायल गुन्देचा सहित कई भक्तजन शामिल थे।
कार्यक्रम के दौरान गुन्देचा परिवार की ओर से श्रद्धालुओं के लिए प्रभावना भी रखी गई, जिसमें सभी ने प्रसाद ग्रहण किया। पूरे आयोजन में श्रद्धा, सेवा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला।
महोत्सव का कुशल संचालन मधुबाई गुलेच्छा ने किया। अंत में सभी भक्तों ने ज्वालामालिनी माता से सुख, शांति और समृद्धि की कामना करते हुए कार्यक्रम का समापन किया। यह आयोजन श्रद्धालुओं के लिए एक अविस्मरणीय आध्यात्मिक अनुभव बन गया।
