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बाली उपखण्ड के चामुंडेरी में शीतला माता मंदिर में महिलाओं ने अलसुबह चढ़ाया ठंडा जल, बीमारी से बचाव की कामना की, आखों की रोशनी कायम रखने को ग्रामीण माता के स्नान का पानी आखों के लगाने है
चामुंडेरी गांव में हर वर्ष आयोजित होने वाले दो दिवसीय शीतला माता मेले से पूर्व मंगलवार अल सुबह श्रद्धा और आस्था का विशेष माहौल देखने को मिला। प्रातः 4 बजे से 5 बजे के बीच गांव की महिलाओं सहित आसपास के क्षेत्रों से पहुंची श्रद्धालु महिलाओं ने शीतला माता मंदिर में ठंडा जल चढ़ाकर परिवार व क्षेत्र की खुशहाली तथा बीमारियों से बचाव की कामना की।
उसके बाद सुबह सुभ मुहर्त में महिलाओं ने माताजी के लगाया बासोड़ा का भोग
चामुंडेरी ग्राम में दो दिवसीय शीतला माता के मेले का आगाज गांव की माता बहनों द्वारा बासोड़ा का भोग लगाने के साथ हुआ इस दौरान माता बहनों ने शीतला माता के मंगल गीत गाकर जयकारे भी लगाए गौरतलब है कि चामुंडेरी ग्राम में आयोजित शीतला माता का दो दिवसीय मेला श्री गौतम ऋषि मेले व भातुण्ड शीतला माता मेले के साथ बड़े मेले में चामुंडेरी शीतला माता के मेले का नाम भी सुमार है मान्यता है कि चामुंडेरी शीतला माता जी की पूजा अर्चना के बाद चेचक जैसी बीमारियों से भी परिवार को मुक्ति मिलती है
मान्यता है कि शीतला माता को ठंडा जल अर्पित करने के बाद बासोड़ा का भोग लगाने से गांव एवं आसपास के क्षेत्र में चेचक जैसी संक्रामक बीमारियों का प्रकोप नहीं फैलता और क्षेत्र रोग भय से मुक्त रहता है। माताजी के स्नान का पानी आखों पर लगाने से आंखों को भी रोग से मुक्ति मिलती है, ग्रामीणों के अनुसार यदि संयोगवश किसी व्यक्ति को यह बीमारी हो भी जाए तो माता के नाम से शरीर के वजन के बराबर गुड़ का भोग लगाकर ‘बोलमा’ करने से रोग शीघ्र दूर हो जाता है।
शीतला माता के चमत्कार और आस्था को लेकर दूर-दराज के गांवों से भी बड़ी संख्या में महिलाएं मंदिर पहुंचकर पूजा-अर्चना करती हैं। मेले को लेकर गांव में उत्साह का माहौल बना हुआ है तथा मंदिर परिसर को आकर्षक रूप से सजाया गया है। आगामी दो दिवसीय मेले में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना जताई जा रही है।
मेले में शीतला माता के प्रति बढ़ती आस्था के अनुसार महिलाओं के जल चढ़ाने के चलते मन्दिर परिसर में पानी ढुलने और लाइन से भगदड़ ना मचे ओर ना फिसलन से कोई हादशा हो को लेकर मन्दिर प्रसासक ने बेहतरीन व्यवस्था की है कि मन्दिर में जल लेकर पहुचने पर जल पात्र बहन बेटियों से पुजारी बदाराम माली उनसे सम्मान पूर्वक ग्रहण कर माता के जल चढाकर माता का स्नान किया पानी देते है वही बासोड़ा का भोग लगाने के लिए बड़ी तादात में महिलाएं पहुचती है साथ ही दर्शन को बड़ी सख्या में श्रदालू भी पहुचते है तो मन्दिर की व्यवस्थाओं के मध्यनजर भोग लगाने के लिए मन्दिर प्रांगण में स्थान निर्धारित किया गया जहां आसानी से माता बहने भोग लगा कर पूजा अर्चना कर रही,
बासोड़ा का भोग लगने के साथ शुरू हुआ मेला
मन्दिर प्रांगण में माता बहनो ने माताजी के बासोड़ा का भोग लगाने के बाद मेले में दुकानें खुली मिठाई दुकानदारों ने मिठाई भूजिये गुलगुले बनाने को कड़ाई चढ़ाई झूले वालो ने भी श्रदालुओ के बैठने को झूले शुरू किए साथ ही मेला देखने लोगो का आवागमन शुरू हुआ लोग माता के जयकारे लगाते हुए मेला स्थल पहुच रहे





