ब्लैक फंगस के मरीजों को कोविड के ही अनुरूप निशुल्क उपचार प्रदान किया जाएगा

PALI SIROHI ONLINE

पाली, 22 मई। प्रदेश में म्यूको मायकोसिस (ब्लैक फंगस) के मरीजों को कोविड के ही अनुरूप निशुल्क उपचार प्रदान किया जाएगा। इस बीमारी को भी चिरंजीवी योजना में शामिल कर लिया गया है। जिला कलक्टर अंश दीप ने इस बीमारी के अर्ली डिटेक्शन की आवश्यकता प्रतिपादित करते हुए कहा कि प्रारम्भिक अवस्था में ही जानकारी प्राप्त होने पर इसका उपचार संभव है एवं र्मोटालिटी को रोकने के साथ ही आंख निकालना जैसी समस्याओं से बचा जा सकता है।
उन्होंने बताया कि विशेषज्ञ चिकित्सकों केे दल द्वारा ब्लैक फंगस के उपचार का प्रोटोकॉल भी निर्धारित कर दिया गया है एवं सूचीबद्ध अस्पतालों को इसी प्रोटोकॉल के अनुसार उपचार करने के निर्देश दिए जा रहे है। राज्य सरकार द्वारा निजी चिकित्सालयों में इस बीमारी की दवाईयों एवं इसके उपचार की दरें भी निर्धारित कर दी गई है।


उन्होंने बताया कि ब्लैक फंगस के उपचार में ईएनटी व नेत्र रोग सहित अन्य विशेषज्ञ चिकित्सकों की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए उपचार के लिए निर्धारित पैरामीटर्स होने पर ही अस्पतालों को सूचीबद्ध किया जाएगा। प्रारम्भ में 20 राजकीय व निजी अस्पतालों को इसके उपचार के लिए सूचीबद्ध किया गया है। निर्धारित पैरामीटर पूरा करने वाले अस्पताल आगे भी सूचीबद्ध हो सकेेंगे। पहले से ही जयपुर के सवाई मानसिंह अस्पताल में इसके लिए अलग से वार्ड बनाकर निर्धारित प्रोटोकॉल व पूरी सावधानी के साथ मरीजों का उपचार किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि विशेषज्ञ चिकित्सकों के अनुसार कोरोना के उपचार के दौरान अधिक स्टेरॉयड देने से म्यूको मायकोसिस (ब्लैक फंगस) की आशंका को ध्यान में रखते हुए स्टेरॉयड के संबंध में निर्धारित प्रोटोकॉल की पालना करने के भी निर्देश दिए गए है। म्यूको मायकोसिस (ब्लैक फंगस) मरीजों की संख्या में निरंतर वृद्धि और कोरोना के साइड इफेक्ट के रूप में सामने आने तथा ब्लैक फंगस एवं कोविड का

समन्वित रूप से उपचार किए जाने के चलते पूर्व में घोषित महामारी कोविड-19 के अन्तर्गत ही ब्लैक फंगस को सम्पूर्ण राज्य में महामारी तथा नोटिफाएबल बीमारी घोषित किया जा चुका है।
उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने इस बीमारी के रोकथाम एवं उपचार के लिए त्रिस्तरीय व्यवस्था की है। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की टीमों को आवश्यक प्रशिक्षण प्रदान कर प्रभावित क्षेत्रों में डोर टू डोर सर्वे के लिए भिजवाया जा रहा है। यह टीमें घर-घर जाकर स्वास्थ्य परीक्षण करेगी। सर्वेक्षण के दौरान कोरोना या ब्लैक फंगस की आशंका होने पर मरीज को अग्रिम उपचार के लिए स्थानीय चिकित्सा संस्थानों में उपचार को भिजवाया जाएगा। मरीज की स्थिति के अनुसार उन्हें जिला स्तरीय अथवा अन्य सूचीबद्ध अस्पतालों में उपचार के लिए भेजा जाएगा।