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सिरोही-पिण्डवाड़ा तहसील के इसरा पंचायत क्षेत्र के ग्रामीणों ने भावरी पंचायत समिति के वार्ड पुनर्गठन पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि 23 जनवरी को जारी नई सूची गलत है, जिससे उन्हें मतदान के लिए 8 किलोमीटर दूर जाना पड़ेगा। ग्रामीणों ने 1 जनवरी को जारी पुराने आदेश को बहाल करने की मांग की है।
नवगठित भावरी पंचायत समिति के ग्रामीणों ने वार्डों के पुनर्गठन पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है। जिला प्रशासन ने वार्डों का व्यवस्थित गठन किया गया था। अब 23 जनवरी को जारी आदेश में फेरबदल कर दिया गया।
ग्रामीणों का आरोप है कि यह बदलाव राजनीतिक दबाव में किया गया है, जिससे निकटवर्ती गांव अलग हो गए और दूरस्थ क्षेत्र जोड़े गए। उन्होंने प्रमुख आपत्तियां व्यक्त करते हुए बताया कि इसरा और खोखरी खेड़ा निकट होने के बावजूद इसरा को दूरस्थ केर से जोड़ा गया है। इससे उन्हें मतदान के लिए 8 किलोमीटर लंबा सफर तय करना पड़ेगा।
ग्रामीणों की मांग है कि इसरा और खोखरी खेड़ा को एक ही वार्ड में रखा जाए। इसी तरह, केर और मांडवाड़ा खालसा जैसी निकटवर्ती पंचायतों को भी तोड़ दिया गया है, जबकि उन्हें पूर्वानुसार एक वार्ड में होना चाहिए। उनका यह भी कहना है कि नए आदेश में आदिवासी बहुल क्षेत्रों को बिखेर दिया गया है, जबकि सामान्य क्षेत्रों को जनसंख्या का ध्यान रखे बिना एकल गाँव का दर्जा दे दिया गया है।
ग्रामीणों ने एक जनवरी 2026 के आदेश को यथावत बहाल करने की मांग की है। उन्होंने कहा, “हमारी भावनाओं व समस्याओं को समझा जाए। राजनीतिक दबाव से वार्ड गठन न हो।” ग्रामीणों ने आशंका जताई है कि मतदान के लिए 8 किलोमीटर तक का लंबा सफर तय करने के कारण संभावित रूप से अधिकतर लोग अपने मताधिकार से वंचित रह सकते हैं।
