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आबूरोड-आबू रोड तहसील के 49 आदिवासी किसान टोंक स्थित केंद्रीय भेड़ एवं ऊन अनुसंधान संस्थान, अविकानगर से पांच दिवसीय प्रशिक्षण के बाद लौटे हैं। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली की टीएसपी उपयोजना के तहत यह प्रशिक्षण 3 से 7 जनवरी, 2026 तक आयोजित किया गया था। इसमें आबू रोड के खारा और सियावा गांवों के 32 महिला और 17 पुरुष किसान शामिल थे।
नस्ल सुधार, स्वास्थ्य, प्रजनन, पोषण के बारे में जानकारी ली
डॉ. भंवर सिंह चौधरी और प्रगतिशील किसान गेनाराम गरासिया के सहयोग से इन किसानों को “वैज्ञानिक भेड़-बकरी एवं खरगोश पालन प्रशिक्षणमय भ्रमण कार्यक्रम” में प्रशिक्षित किया गया। संस्थान के निदेशक डॉ. अरुण कुमार तोमर ने बताया कि प्रशिक्षण में अधिक उत्पादन के लिए कृषि और पशुपालन से संबंधित आवश्यक जानकारी दी गई। वैज्ञानिकों ने नस्ल सुधार, स्वास्थ्य, प्रजनन, पोषण और विभिन्न मौसम आधारित प्रबंधन के बारे में भी बताया।
समापन कार्यक्रम में निदेशक डॉ. तोमर ने सभी किसानों से प्रशिक्षण का फीडबैक लिया और उन्हें प्राप्त ज्ञान तथा भ्रमण के दौरान देखी गई नवीन तकनीकों को अपनाने का आग्रह किया। उन्होंने विशेष रूप से बताया कि अविकानगर संस्थान द्वारा ब्रायलर खरगोश की नस्ल को बढ़ावा देने के लिए यह प्रशिक्षण आयोजित किया गया था।
कृषि और पशुपालन की उन्नत तकनीकों का अवलोकन किया
सिरोही जिले के कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी डॉ. सुरेश कुमार खींची ने आदिवासी किसानों को नवीन तकनीकों के साथ-साथ भारत सरकार द्वारा विकसित भारत गारंटी रोजगार आजीविका मिशन ग्रामीण एक्ट-2025 (विकसित भारत -जीरामजी) के बारे में भी जागरूक किया। किसानों ने रास्ते में भ्रमण के दौरान प्रदर्शित कृषि और पशुपालन की उन्नत तकनीकों का भी अवलोकन किया।
टीएसपी उपयोजना के नोडल अधिकारी डॉ. अमरसिंह मीना ने बताया कि प्रशिक्षण में भाग लेने वाले सभी आदिवासी किसानों को प्रशिक्षण के उपरांत कृषि और पशुपालन के लिए आवश्यक सामग्री वितरित की गई। इसमें स्टील तसला, स्टील बाल्टी, तीन किलो मिनरल्स मिक्सचर ईंट, सब्जी किट, स्वास्थ्य कैलेंडर, बैग, टॉवल और प्रशिक्षण किट शामिल थे।

