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मालनू में आस्था,प्रकृति सेवा का संदेश आज भी जीवंत, अघोरी संत श्री श्री जोरजी बावसी का विशाल मेला सम्पन्न

Pintu Aggarwal by Pintu Aggarwal
June 15, 2026
in Local
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PALI SIROHI ONLINE

बाली उपखण्ड के मालनू ग्राम में आस्था, प्रकृति और सेवा का संदेश आज भी जीवंत है, पर्यावरण प्रेमी अघोरी संत श्री श्री जोरजी बावसी का विशाल मेला सम्पन्न

मालनू ग्राम में स्थित अघोरी संत श्री श्री जोरजी बावसी का आस्था स्थल आज केवल एक धार्मिक स्थान नहीं, बल्कि श्रद्धा, सेवा, प्रकृति प्रेम और जनविश्वास का जीवंत केन्द्र बन चुका है।उनकी चतुर्थ पुण्यतिथि पर आयोजित विशाल मेले में हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लेकर संत के प्रति अपनी अटूट श्रद्धा व्यक्त की।

कार्यक्रम की शुरुआत संत की प्रकृति एवं पर्यावरण के प्रति समर्पित भावना को नमन करते हुए पौधारोपण से की गई। श्रद्धालुओं ने उनकी बगीची में 4 पौधे लगाकर कार्यक्रम का शुभारम्भ किया तथा आगामी समय में उनके नाम पर 400 छायादार पौधे लगाने का सामूहिक संकल्प लिया।

मालनू, निकटवर्ती गांवों, बाली परगना, रोई परगना सहित 36 कौम के लोगों की यह मान्यता रही है कि संत श्री जोरजी बावसी ने अपने जीवन को लोककल्याण और सेवा को समर्पित किया। मध्यप्रदेश, गुजरात, उदयपुर सहित विभिन्न क्षेत्रों से भी श्रद्धालु, व्यवसायी, किसान, जनप्रतिनिधि, कर्मचारी एवं अधिकारी यहां पहुंचकर श्रद्धा अर्पित करते हैं।

कहा जाता है कि मालनू–सिवेरा मार्ग पर स्थित उनकी साधारण झोपड़ी उनके जीवनकाल में लोगों के लिए आशा और विश्वास का स्थान थी। प्रतिदिन सैकड़ों भाविक वहां पहुंचकर अपने मन की बात कहते, अपनी मन्नतें व्यक्त करते और जीवन की कठिनाइयों के समाधान हेतु आशीर्वाद प्राप्त करते थे। श्रद्धालुओं की आस्था है कि उन्हें वहां से मानसिक शांति, संबल और सकारात्मक अनुभव प्राप्त हुए।

संत श्री जोरजी बावसी ने लगभग तीन दशकों तक अत्यंत सादगीपूर्ण जीवन व्यतीत किया। लोकमान्यता के अनुसार उन्होंने धरती को आशियाना और आकाश को छत मानकर कठिन परिस्थितियों में तप, सेवा और जनसंपर्क का मार्ग अपनाया। वे लोगों के दुख-दर्द सुनते, निस्वार्थ भाव से मार्गदर्शन करते और जीव सेवा, गौसेवा, पक्षियों एवं प्रकृति संरक्षण का संदेश देते रहे।

उनके परलोकगमन के पश्चात श्रद्धालुओं ने उनकी कुटिया स्थल को स्मृति और आस्था के केन्द्र के रूप में विकसित करने का संकल्प लिया है। इसी भावना के साथ वहां जनसहयोग से मंदिर निर्माण का कार्य आगे बढ़ाने का निर्णय लिया गया है, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी संत के संदेश से जुड़ सकें।

भक्तों के अनुसार यह स्थान आज भी श्रद्धा का केन्द्र बना हुआ है, जहां लोग शुभ संकल्प और प्रार्थनाओं के साथ पहुंचते हैं।

मेले में महाप्रसाद, धार्मिक आयोजन और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया। सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक कलाकारों ने भजनों की प्रस्तुति दी और श्रद्धालु भक्ति रस में झूमते रहे।

इस अवसर पर पिंडवाड़ा विधायक समाराम गरासिया ने भी रोई परगना के मुख्य पंच श्री धन्नाराम जी के साथ शिरकत की। श्रद्धालुओं द्वारा उनका स्वागत एवं सम्मान किया गया। उपस्थित जनों ने बताया कि मालनू आस्था स्थल तक पहुंच को सुगम बनाने हेतु सिवेरा से मालनू तक लगभग 6 किलोमीटर सड़क निर्माण का कार्य विधायक के सहयोग से पूर्ण करवाया गया, जिससे श्रद्धालुओं एवं ग्रामीणों को बड़ी सुविधा मिली है।
आज मालनू का यह स्थल केवल एक मेला नहीं, बल्कि समाज, सेवा, पर्यावरण और आस्था को जोड़ने वाला एक जीवंत जनआंदोलन बनता दिखाई दे रहा है।

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