सनातन जनवाणी का विमोचन, बोले- संस्कार और परंपरा जरूरी
PALI SIROHI ONLINE
सनातन जनवाणी का विमोचन, बोले- संस्कार और परंपरा जरूरी
भारतीय नववर्ष पर वार्षिक कैलेंडर जारी, समाज को एक मंच पर लाने का प्रयास
भारतीय नववर्ष के अवसर पर मारवाड़ की धरती पर “सनातन जनवाणी” वार्षिक कैलेंडर का विमोचन परंपरागत तरीके से किया गया। इस अवसर पर जणवा समाज के कई लोग मौजूद रहे। कार्यक्रम में वक्ताओं ने संस्कार और परंपरा को समाज की मजबूती का आधार बताते हुए इसे आगे बढ़ाने की जरूरत जताई।
वार्षिक कैलेंडर के संपादक नरेश जणवा, जलोदा जागीर ने बताया कि पहली बार सनातन संस्कृति को केंद्र में रखकर कैलेंडर का विमोचन भारतीय नववर्ष पर किया गया। उन्होंने कहा कि कैलेंडर केवल तिथियों का संकलन नहीं, बल्कि संस्कृति, परंपरा और सामाजिक जागरूकता का दस्तावेज है। इसमें हिंदू संस्कृति के 16 संस्कार, वर्ण परंपरा और भारतीय पंचांग के महीनों की विस्तृत जानकारी दी गई है। साथ ही राजस्थान और भारत सरकार की ओर से जारी आपातकालीन नंबरों की सूची भी शामिल की गई है, जिससे जरूरत के समय आमजन को मदद मिल सके।
कैलेंडर का उद्देश्य अखिल भारतीय स्तर पर जणवा समाज को एक मंच पर जोड़ना है। इसके तहत मेवाड़ के प्रतापगढ़ जिले के 9 गांव, चित्तौड़गढ़ के 9 गांव, उदयपुर के 9 गांव, मारवाड़ के पाली जिले के 22 गांव, गोड़वाड़ क्षेत्र के 42 गांव, सिरोही जिले के 8 गांव, हाड़ोती के कोटा जिले के 2 गांव और झालावाड़ जिले के 6 गांवों के साथ मध्यप्रदेश के मंदसौर के 6, राजगढ़ के 9 और शाजापुर के 5 गांवों को जोड़ा गया है। इसके अलावा महाराष्ट्र, गुजरात और कर्नाटक में रहने वाले समाजजनों को भी इस पहल से जोड़ा गया है।
बताया गया कि पिछले दशक से समाजसेवियों के सहयोग से इस कैलेंडर की शुरुआत हुई थी। वर्ष 2019 से अब तक इसकी सवा लाख से अधिक प्रतियां निःशुल्क वितरित की जा चुकी हैं। समाज के कई भामाशाहों और समाजसेवियों ने इसे अखिल भारतीय स्तर तक पहुंचाने में सहयोग दिया है। बुधवार को कैलेंडर नाथद्वारा श्रीनाथ जी मंदिर, द्वारकाधीश मंदिर राजसमंद, चारभुजा मंदिर गढ़बोर पर भेंट किए। इसके बाद देसूरी, नारलाई, गोवाड़ा, अटाटिया, निपल, केसुली, रामाजी गुडा, डुठारिया, खौड़, आना, शोभावास, माडपुर, लाम्पी आदि गांवों में सनातन जनवाणी वार्षिक कैलेंडर का विमोचन किया गया। कार्यक्रम में श्री श्री 1008 करुणा करणदास जी महाराज केसुली आश्रम, लालाराम घाणेराव, नरेश जणवा जलोदा जागीर और शंकर जणवा चौधरी अटाटिया, समाराम, जितेंद्र, सकाराम, अधिवक्ता अमर जणवा, ढलाराम, सकाराम सहित कई समाजजन उपस्थित रहे।
तिथियों के आधार पर होती है पर्वों की गणना….
कार्यक्रम के दौरान यह भी बताया गया कि सभी पर्व और त्योहार तिथियों और सौर मंडल की स्थिति के आधार पर निर्धारित होते हैं, न कि अंग्रेजी महीनों की तारीखों के अनुसार। वक्ताओं ने कहा कि भारतीय संस्कृति की वैज्ञानिकता इसी व्यवस्था में निहित है, जिसे समझना और अपनाना जरूरी है।
इस मौके पर समाजजनों से अपील की गई कि पाश्चात्य संस्कृति और अंग्रेजी वर्ष के प्रभाव से बाहर निकलकर सनातन परंपराओं की ओर लौटने का प्रयास करें। बच्चों को भी संस्कार और परंपरा के अनुरूप जीवन जीने के लिए प्रेरित करने पर जोर दिया गया।
चैत्र माह में नवरात्रि की शुरुआत के साथ देशभर में भक्ति और शक्ति का वातावरण बनता है। ऐसे समय में नव संवत्सर पर कैलेंडर का विमोचन नई ऊर्जा और सकारात्मक सोच के साथ एक सार्थक पहल के रूप में सामने आया है। आयोजकों के अनुसार यह प्रयास आने वाले समय में समाज को सांस्कृतिक रूप से और अधिक मजबूत बनाएगा।
