• March 10, 2026

तखतगढ-150 वर्ष पुराने सोने – चांदी के आभूषण पहनकर ईशर गणगौर की हुई पुजा अर्चना

PALI SIROHI ONLINE

खीमाराम मेवाडा

150 वर्ष पुराने सोने – चांदी के आभूषण पहनकर ईश्वर गणगौर की हुई पुजा अर्चना

कुंवारी कन्याएं और सुहागिन ने
अखंड सुहाग व सुयोग्य वर की कामनाए की

तखतगढ 10 माचॅ (खीमाराम मेवाडा) वैवाहिक सुख, सौभाग्य, और प्रेम का प्रतीक ईश्वर-गणगौर मंदिर को फूलों से सजावट एवं ईश्वर-गणगौर को वस्त्र पहनकर सोने चांदी के आभूषण पहनकर पूजा अर्चना के बाद दर्शनों की लगी कतार मंगलवार को पटवार भवन के पास ईश्वर गणगौर मंदिर में नायब तहसीलदार जितेंद्र बाबरेवाल एवं पटवारी रमेश चौधरी प्रतिहारी नाथूराम मेघवाल सहित नगर वासियों की मौजूदगी में ईश्वर गणगौर की प्रतिमाओं को राजशाही पोशाक वस्त्रो से श्रृंगार कर करीबन 150 वर्ष पुराने सोने – चांदी के आभूषण पहनकर विधिवत ईश्वर गणगौर की ढोल थाली की गुंजायमान के साथ पूजा अर्चना की गई। प्रसाद वितरण के बाद दर्शनों के लिए कतार लग गई।

ज्ञात रहे की ईश्वर-गणगौर राजस्थान का एक प्रमुख सांस्कृतिक त्योहार माना जाता है।तह परंपरा होली के दूसरे दिन से शुरू होकर यह 16 दिनों तक चलता है। माता पार्वती अपने पीहर आती हैं। और 18 दिनों बाद शिवजी उन्हें लेने आते हैं। महिलाएं मिट्टी की ‘ईसर’ (शिव) और ‘गवर’ (पार्वती) की मूर्ति बनाती हैं और उन्हें सजाती हैं। और पूजा करती है। इस पर्व पर विभिन्न प्रकार के लोकगीत गाए जाते हैं, जो राजस्थान की संस्कृति की आत्मा हैं। यह वैवाहिक सुख, सौभाग्य, और प्रेम का प्रतीक माना गया है। कुंवारी कन्याएं और सुहागिनें मिट्टी की मूर्तियां बनाकर अखंड सुहाग व सुयोग्य वर की कामना करती हैं।

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