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जय नारायण सिंह सोजत
अफ्रीका की धरती पर गूंजा ‘शेर-ए-पंजाब’ का जयघोष: मलावी में महाराजा रणजीत सिंह की प्रतिमा का भव्य अनावरण
ब्लैंटायर, मलावी:
मलावी गणराज्य के ब्लैंटायर (लिम्बे) में 19 अप्रैल, 2026 का दिन इतिहास के पन्नों में सुनहरे अक्षरों से दर्ज हो गया। बैसाखी के पावन पर्व पर, ‘शेर-ए-पंजाब’ महाराजा रणजीत सिंह की शौर्यगाथा सात समंदर पार अफ्रीका महाद्वीप की फिजाओं में गूंज उठी। सिख गुरुद्वारे में आयोजित एक गरिमामयी समारोह में भारत के उच्चायुक्त महामहिम श्री अमराराम गुर्जर और ब्लैंटायर के महापौर माननीय पार्षद इसहाक जोमो उस्मान ने संयुक्त रूप से महाराजा रणजीत सिंह की प्रतिमा का अनावरण किया।
कूटनीति और संस्कृति का अनूठा संगम
यह केवल एक प्रतिमा का अनावरण नहीं था, बल्कि भारत और मलावी के बीच गहरे होते सांस्कृतिक सेतु का जीवंत प्रमाण था। भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (ICCR) द्वारा भेंट की गई यह प्रतिमा उच्चायुक्त श्री अमराराम गुर्जर की उस दूरदर्शी सोच का परिणाम है, जो उन्होंने पिछले वर्ष सिख एसोसिएशन ऑफ मलावी (SAM) के साथ साझा की थी।
समारोह की झलकियां:
जनसैलाब: बैसाखी के उल्लास के बीच आयोजित इस कार्यक्रम में 400 से अधिक प्रवासी भारतीय, सिख समुदाय के सदस्य और भारत के शुभचिंतक साक्षी बने।
विरासत को सम्मान: महाराजा रणजीत सिंह, जिन्होंने पंजाब में न्याय, सहिष्णुता और एकता के स्वर्ण युग की स्थापना की थी, उनकी उपस्थिति अब मलावी के सिखों को अपनी जड़ों से जोड़े रखेगी।
शताब्दी की ओर बढ़ते कदम: मलावी का सिख समुदाय, जिसने 1928 में यहाँ अपना पहला गुरुद्वारा स्थापित किया था, अब 2028 में अपने 100 वर्ष पूरे करने जा रहा है। यह प्रतिमा उस गौरवशाली यात्रा का एक मील का पत्थर है।
सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक
महाराजा रणजीत सिंह की यह प्रतिमा आने वाली पीढ़ियों को उनके अदम्य साहस, नेतृत्व और मानवतावादी दृष्टिकोण की याद दिलाती रहेगी। यह मलावी के विकास में वहां के भारतीय समुदाय के योगदान और उनकी अटूट सांस्कृतिक पहचान का एक सशक्त उद्घोष है।
भारतीय संस्कृति को आगे बढ़ाने पर गुर्जर के मित्र महेंद्र भारती, जयनारायण सिंह,भमसा वोपारी , सहित पेतृक गांव ढुंडा लाबोडी़ व पाली जिले में हर्ष की लहर है

